मध्यप्रदेश में नदी पहाड़ों के साथ चोरी और अवैध उत्खनन इधर जय नमामि नर्मदे

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अवधेश पुरोहित
भोपाल। मध्यप्रदेश में पिछले कुछ दिनों से नमामि नर्मदे यात्रा को लेकर मुख्यमंत्री काफी उत्साहित हैं और वह यह दावा कर रहे हैं कि इस यात्रा के जरिए जहां नदियों के संरक्षण के मामले में हम देश दुनिया को नई दशा देंगे तो वहीं जल पुरुष राजेन्द्र सिंह इस यात्रा को एक ढकोसला मान रहे हैं, लेकिन मध्यप्रदेश में नदियों को बचाने का राजधर्म मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नममि नर्मदे यात्रा से शुरू किया है तो वहीं सियासत के धर्मराज इस यात्रा को लेकर यह दावा करते नजर आ रहे हैं कि नदिया बचेंगी, खनन भी रुकेगा, लेकिन जो परिस्थितियां हैं उसमें धर्म आधारित राजनीति करने वाले सियासत के साधु-संतों पर कोई भरोसा नहीं कर रहा है।
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मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान
मुख्यमंत्री की नमामि नर्मदे यात्रा और धर्म आधारित राजनीति करने वाले सियासत के साधुओं को लेकर तरह-तरह की चर्चाएं व्याप्त हैं और इस मुद्दे को लेकर भोपाल के वरिष्ठ पत्रकार राघवेन्द्र सिंह ने राजधानी से प्रकाशित नया इंडिया समाचार पत्र में अपने कालम न काउ से बैर में लिखा है कि मध्यप्रदेश में नदियों को बचाने का राजधर्म मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने नमामि देवी नर्मदे से शुरू किया है। जबसे अभियान प्रारंभ हुआ नदी पहाड़ों के साथ चोरी और अवैध खनन की खबरें सुर्खियों में हैं। जैसे नर्मदे में हरी शैवाल के आने से जल इतना प्रदूषित हो रहा है कि घाट बदबू से भर रहे हैं और लोगों को नहाने में परेशानी हो रही है। गोटेगांव के पास हिरन नदी में शैवाल के नर्मदा के मिलने की बात कही जा रही है। हालांकि ये पहले भी होते रहा होगा लेकिन नर्मदाजल खुद ही इस कचरे को नष्ट कर देता रहा होगा।
अब रेत की कमी और प्रदूषण बढऩे की वजह से नर्मदा जल इस वनस्पति को खत्म नहीं कर पा रहा है। नदियों की बदहाली का आलम यह है कि वो दर्जन से ज्यादा नदियां मार्च में ही सूखने लगी हैं। मई जून तक क्या स्थिति होगी कहा नहीं जा सकता। रेत खनन माफियाओं ने अपने लाभ के लिए नदियों का प्रवाह तक बदलने की कोशिश की है। बेतवा नदी के पुलिस से नीचे हुए खनन से तो बारिश में पुल भी खतरे में आ सकता है। लेकिन सियासत के धर्मराज कह रहे हैं कि नदियां बचेंगी खनन भी रुकेगा लेकिन जो स्थितियां हैं उससे धर्म आधारित राजनीति करने वले सियासत के साधुओं पर कोई भरोसा नहीं कर रहा है।
धर्मराजों की जय हो। कुल मिलाकर प्रदेश में इन दिनों नर्मदा को संरक्षित करने के बड़े-बड़े दावे किये जा रहे हैं लेकिन वहीं दूसरी ओर इसी नर्मदा से सरकारी संरक्षण में सत्ताधीशों से जुड़े परिजन दिन-रात अवैध रेत खनन का कारोबार धड़ल्ले से चला रहे हैं स्थिति यह है कि नर्मदा से हो रहे अवैध उत्खनन के चलते नर्मदा में अब केवल रेत नहीं बल्कि मिट्टी बची है और जिसकी वजह से पानी रुकने की कोई गुंजाइश नहीं है यदि यही स्थिति रही तो जिस नर्मदा को प्रदेश की जीवनदायिनी होने का दावा किया जाता रहा है वह नष्ट होती नजर आएगी और प्रदेश की आधी से ज्यादा आबादी जो नर्मदा पर निर्भर है वह एक एक बूंद पानी के लिये जूझेगी।