सीएजी रिपोर्ट सदन में पेश, अभी नहीं थमेगी राफेल पर पक्ष और विपक्ष की लड़ाई

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TOC NEWS @ www.tocnews.org

नई दिल्ली. लंबे समय से राफेल पर जिस सीएजी रिपोर्ट का इंतजार हो रहा था, वह सत्ता और विपक्ष दोनों के लिए कुछ न कुछ खास लेकर आया है। इस रिपोर्ट में दोनों पक्षों के लिए परेशानी खड़े करने के पर्याप्त कारण हैं। इस रिपोर्ट के बाद सत्ता पक्ष और विरोधी पक्ष एक दूसरे पर ज्यादा हावी होने का प्रयास करेंगे। इसके साथ यह भी साफ हो गया है कि यह लड़ाई अभी थमने वाली नहीं है।

बजट सत्र के आखिरी दिन सदन के पटल पर पेश की गई सीएजी रिपोर्ट में मौटे तौर पर यह बात सामने आई है कि एनडीए के कार्यकाल में 36 राफेल की 7.87 बिलियन यूरो में तय हुई डील यूपीए के कार्यकाल में साल 2012 में हुई डील के मुकाबले 2.86 प्रतिशत सस्ती है।

इस रिपोर्ट के बाद यह तो साफ हो जाता है कि सरकार इस डील को लेकर बेहतर स्थिति में है, क्योंकि सरकार की तरफ से दावा किया गया था कि उन्होंने यूपीए सरकार के मुकाबले सस्ती डील हासिल की है। हालांकि कुछ सीनियर मंत्रियों ने दावा किया था कि यह डील पिछली डील के मुकाबले 9 प्रतिशत सस्ती है, ऐसे में उनका यह दावा भी धराशा

सीएजी रिपोर्ट में दावा किया गया है कि बैंकिंग और परफॉर्मेंस गारंटी को बीच से हटाकर इस डील को सस्ता किया गया है। सीएजी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत के पक्षकारों ने इस डील को तभी फाइनल किया है, जब यह बात सुनिश्चित हो गई कि बैंकिंग चार्जेज हटा लिए जाएंगे।

वहीं फाइटर जेट की डिलीवरी के समय को लेकर भी सीएजी रिपोर्ट में सरकार को थोड़ा श्रेय दिया गया है। रिपोर्ट में बताया गया है कि पिछली डील के मुकाबले इस डील में विमान एक महीने पहले सेना को मिल जाएंगे। सीएजी ने रिपोर्ट में यह भी कहा है कि सरकार बेहतर कीमत निर्धारित करने के लिए यूरोफाइटर द्वारा अनचाही पेशकश से तुलनात्मक मूल्य निर्धारण का उपयोग कर सकती थी।

सीएजी की रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि जेट की बेसिक कीमत दोनों सरकारों के कार्यकाल में एक ही है। किसी भी विवाद की स्थिति पर सीएजी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि यदि इस डील में कोई विवाद, जैसे समय पर डिलीवरी न होना या तय क्वॉलिटी के हिसाब से जेट न होने पर दोनों पक्षों को मध्यस्थता के लिए जाना होगा। फ्रांस की सरकार यह सुनिश्चित करेगी कि यदि इस मध्यस्थता की बातचीत में भारतीय पक्ष जीतता है तो फ्रांस की कंपनी उन्हें भगुतान करेगी। यदि दोनों पक्षों में से कोई भी पक्ष तय संधियों का उल्लंघन करता है तो बैंकिंग गारंटी को खत्म किया जा सकता है।

बता दें कि सीएजी की रिपोर्ट सदन में पेश होने के बाद केंद्रीय मंत्री अरुण जेटली ने राफेल डील पर सवाल उठा रहे विपक्ष पर हमला बोला है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस लगातार झूठ फैला रही थी, जिसे रिपोर्ट ने साफ कर दिया है। रिपोर्ट को सच की जीत बताते हुए जेटली ने कहा कि गुमराह करनेवाले लोगों को जनता ही सजा देगी।

जेटली ने कहा कि रिपोर्ट ने कांग्रेस पार्टी द्वारा फैलाए जा रहे बड़े झूठों का भंडाफोड़ दिया, जिसे कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष राहुल गांधी बार-बार फैला रहे थे। उन्होंने कहा कि अब डील से सुप्रीम कोर्ट संतुष्ट है, सीएजी भी संतुष्ट है, जिससे सरकार की नीयत पर सवाल नहीं उठना चाहिए। उन्होंने आगे कहा, ‘मामले को यहीं खत्म नहीं होना चाहिए, लोगों को उन्हें सजा जरूर देनी चाहिए जिन्होंने उन्हें गुमराह किया।

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