संघ परस्त 42 करोड़ रुपए के घोटालेबाज अफसर संजीव दुबे पर कमलनाथ सरकार इतनी मेहरबान क्यों?

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TOC NEWS @ www.tocnews.org

अनिल जोशी

भोपाल। पंद्रह साल विपक्ष में रहते हुए कांग्रेस ने जिस शराब घोटाले को लेकर शिवराज सरकार की घेराबंदी की थी और आबकारी विभाग के सबसे भ्रष्ट अफसर और शराब घोटाले के आरोपी संजीव दुबे की बहाली पर जमकर हो-हल्ला मचाया था, सत्ता में आते ही कमलनाथ सरकार ने उसी घोटाले बाज आबकारी अधिकारी को उपकृत करते हुए इनाम स्वरूप शराब कारोबारियों-माफियाओं का स्वर्ग कहने वाले धार जिले में सहायक आबकारी आयुक्त तैनात कर दिया।

दरअसल, यह वही संजीव दुबे है, जिसने पंद्रह सालों तक आरएसएस (राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ) के पदाधिकारी सुरेश सोनी, पराग अभ्यंकर, पूर्व मंत्री लक्ष्मीकांत शर्मा और खदान कारोबारी सुधीर शर्मा के साथ भाजपा सत्ता शीर्ष का करीबी रहकर आबकारी महकमे को खूब आर्थिक पलीता लगाया। संजीब दुबे को इंदौर में शराब ठेका के बैंक चालानों में 42 करोड़ रुपए के घोटाले और 2015-16 में खरगोन, झाबुआ, खंडवा, बड़वानी जिले में 34 करोड़ रुपए के हेरफेर के आरोप में पहले सस्पेंड किया गया। फिर सत्ता शीर्ष के दबाव में बहाल कर दिया गया।

जिसके विरोध में नेता प्रतिपक्ष अजय सिंह मुख्यमंत्री निवास पर लगी शिकायत पेटी में अपनी शिकायत डालने गए थे। तब उन्होंने शिवराज सरकार की घेराबंदी करते हुए कहा था कि, सरकार की ऐसी कौन सी मजबूरी थी जिसे विभागीय जॉच के चलते घोटाले के आरोपियों को बहाल किया गया।  तब अजय सिंह ने कहा था कि निलंबित आरोपियों ने इस घोटाले में सत्ताशीर्ष से जुड़े लोगों के नाम उजागर करने की धमकी दी थी। इसके चलते इन अधिकारियों की बहाली की गई।

पहले भी रहा है आरोपों के घेरे में

घोटाले बाज संजीव दुबे पहले भी कई मामलों में आरोपों के घेरे में रहा है। उसने विदिशा और रतलाम और दूसरे जिलों में रहते हुए आबकारी महकमे के राजस्व को करोड़ों रुपए का नुकसान पहुंचाया है। लेकिन भाजपा और संध के नेताओं की नजदीकियों के चलते कोई भी संजीब का बाल भी बांका नहीं कर सका है। वर्ष 2004 में संजीव ने कई शराब दुकानदारों से बिना लाइसेंस फीस जमा कराए उन्हें दुकानें आवंटित कर दी थी, जिसके चलते सरकार को करीब एक करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान उठाना पड़ा था। इस मामले में भी आरोप के खिलाफ आरोप जारी हो चुका है।

कौन है संजीव दुबे

संजीव दुबे वही अधिकारी है जिस पर इंदौर में शराब माफियाओं के साथ गठजोड़ कर सरकार को 42 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान आरोप है। इस मामले का दिलचस्प पहलू यह है कि सरकार की तमाम कोशिशों के बावजूद अभी तक 42 करोड़ रुपए की रिकवरी सरकार नहीं कर पाई है। इस मामले में संजीव दुबे सहित सात अधिकारियों को निलंबित कर दिया गया था। लेकिन भाजपा सरकार में रसूख के चलते संजीव ने न केवल अपनी बहाली करा ली, बल्कि जोड़तोड़ से देवास में अपनी पदस्थापना करा डाली। जबकि नियमों के अनुसार गंभीर विभागीय जांच के चलते किसी भी अधिकारी को मैदानी पदस्थापना नहीं दी जा सकती है।

मनोज को सजा, दुबे को तोहफा

इस शराब घोटाले बाज को बचाने की सजा के बतौर सरकार ने एक्साइज महकमे के प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव का तबादला कर दिया और उन्हें लूप लाइन कहलाने वाले पशु पालन विभाग में भेज दिया। जबकि संजीव दुबे को इनाम स्वरूप शराब माफियाओं का स्वर्ग कहे जाने वाले जिले धार का सहायक आबकारी आयुक्त बनाया है।

अपनी पत्नी को संघ पर कराई पीएचडी

सरकारी शराब ठेकों के घोटालेबाज सहायक आबकारी आयुक्त संजीव दुबे ने भाजपा के सत्ताशीर्ष के करीबी पहुंचने के लिए अपनी पत्नी को संघ की विचाराधारा पर पीएचडी कराई है। संजीव खुद को संघ के प्रमुख पदाधिकारी सुरेश सोनी और पराग अभ्यंकर के करीबियों में बताता रहा है।

बाबा के लिए बनवाई कोठी

सूत्रों के अनुसार घोटालेबाज संजीव ने भाजपा सत्ताशीर्ष के सबसे करीबी संतों में शुमार उत्तम स्वामी के लिए भोपाल स्थित चूनाभट्टी बस्ती में विशाल कोठी बनाकर दी है।

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