85 सौ लोगों के बना दिए गए फर्जी प्रेस कार्ड, पुलिस ने पकड़ा

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TOC NEWS @ http://tocnews.org/

दिल्ली क्राइम भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा के नाम से 85 सौ लोगों के फर्जी प्रेस कार्ड बनाए जाने का एक सनसनीखेज मामला सामने आया है। पुलिस ने इस मामले का खुलासा करते हुए कार्यवाही भी की है। फ़र्ज़ी कार्ड जारी काने वाली संस्था का कहना होता था कि कार्ड होगा तो पुलिस नहीं पकड़ेगी और टोल भी नहीं लगेगा। 15 सौ रुपए में कार्ड बनाकर देने वाले फिलहाल पुलिस हिरासत पर हैं।

दिल्ली क्राइम भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा प्रेस का कार्ड होगा तो पुलिस नहीं पकड़ेगी। देश में कहीं भी टोल टैक्स भी नहीं देना पड़ेगा। यह कहकर एक व्यक्ति से 15 सौ रुपए लेकर कार्ड बनाकर देने वाले ठग को वटवा पुलिस ने धर दबोचा है। आरोपी द्वारा की गई पूछताछ में अब तक करीब 85 लोगों को कार्ड बनाकर अपनी संस्था का सदस्य बनाए जाने की बात सामने आई है।संस्था के ऑफिस से इस संदर्भ में काफी दस्तावेज भी मिले हैं।

गिरफ्तार आरोपी यमुनाशंकर पांडे (22) वटवा में निगम सोसायटी के समीप सोनू पार्क में रहता है। इसकी ठगी की पोल तब खुली जब इसकी बातों में आकर 15 सौ रुपए गंवाने वाले निगम सोसायटी निवासी उमाकांत क्षत्रिय को ठगे जाने का एहसास हुआ और वह रविवार को वटवा थाने में इसकी शिकायत करने पहुंचे।

उमाशंकर ने बताया कि आरोपी ने खुद दिल्ली भ्रष्टाचार विरोधी मोर्चा चलाते होने की बात कही। कहा कि इसका सदस्य बनने के लिए तुम्हें 1500 रुपए देने होंगे। जिस पर वह दिल्ली क्राइम प्रेस का एक कार्ड देगा। जो पूरे देश में चलेगा। कार्ड दिखाने पर देश में कहीं भी पुलिस तुम्हें रोकेगी नहीं, पकड़ेगी नहीं, दंड नहीं देगी। इतना ही नहीं देश के किसी भी टोल टैक्स पर तुम्हे टोल नहीं देना होगा। बातों में आकर कार्ड लिया, लेकिन यह कार्ड टोल टैक्स पर दिखाने व सरकारी कार्यालयों में दिखाने पर भी कोई फायदा नहीं हुआ तो ठगी का एहसास होने पर थाने में शिकायत की।

आरोपी के पास से मिले कार्ड व गेबनशा की दरगाह के समीप कार्यालय में दबिश देकर मिले कागजात और कार्ड में दिल्ली के पुलिस उपायुक्त के हस्ताक्षर व सील का उपयोग मिला है। जिससे दिल्ली पुलिस को पत्र लिखकर इस संदर्भ में जानकारी मांगी है। आरोपी के विरुद्ध ठगी व विश्वासघात का मामला दर्ज कर उसे गिरफ्तार कर लिया है। आरोपी एक बार सदस्य बन जाने पर अपने नीचे पांच सदस्य बनाने की छूट भी देता था। और उनके नीचे के सदस्य भी पांच करके 125 तक सदस्य बना सकते थे। ज्यादा सदस्य बनने पर कमीशन देने की भी बात आरोपी कहता होने का आरोप लगाया है।

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