पुलिस अधीक्षक जबलपुर ने ली चयनित किये गये शासकीय स्कूलों के प्राचार्यो की बैठक

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जिला ब्यूरो चीफ जबलपुर // प्रशांत वैश्य : 79990 57770

जबलपुर। आज दिनॉक 14-9-18 को दोपहर 2-30 बजे पुलिस कन्ट्रोलरूम जबलपुर में स्टूडेंट पुलिस कैडिट (एस.पी.सी.) योजना संचालन हेतु पुलिस अधीक्षक जबलपुर श्री अमित सिंह (भा.पु.से.) द्वारा एक बैठक ली गयी। बेठक मे अति. पुलिस अधीक्षक शहर श्री राजेश कुमार त्रिपाठी, डॉ. संजीव उइके, जिला शिक्षा अधिकारी श्री घनश्याम सोनी सहित योजना हेतु चयनित किये गये 15 शासकीय स्कूलों के प्राचार्य उपस्थित थे।

नोडल अधिकारी अति.पुलिस अधीक्षक साउथ डॉ संजीव उइके ने जानकारी देते हुये बताया कि स्टूडेंट पुलिस कैडिट (एस.पी.सी.) योजना मंत्रालय के निर्देशानुसार मध्य प्रदेश में भी लागू की जाना है, यह योजना केन्द्र द्वारा प्रायोजित होकर केवल शासकीय स्कूल के विद्यार्थियो के लिये बनायी गयी है, जिसकी अवधि 3 वर्ष के लिये रहेगी। 3 साल में 2 बैच को प्रशिक्षित किया जाना है। इस योजना के अंन्तर्गत शिक्षण सत्र में प्रत्येक माह मे कम से कम 1 घंटे पुलिस कैडिट्स को निर्धारित विषयों पर प्रशिक्षण दिया जायेगा एंव चर्चा की जायेगी तथा आउंट डोर प्रशिक्षण भी माह मे कम से कम 2 बार दिया जायेगा।

योजना को कियान्वित करने के लिये प्रत्येक चयनित स्कूल को 50 हजार रूपये प्रतिवर्ष दिये जायेंगें जिसमे 16 हजार रूपये प्रशिक्षण हेतु, उपकरण क्रय करने के लिये, 24 हजार रूपये आउट डोर गतिविधियों के लिये तथा 5 हजार रूपये प्रशिक्षण एवं आकस्मिक कार्य के लिये विभाजित  किये गये है। प्रथम चरण मे यह योजना प्रदेश मे 456 स्कूलो में प्रारम्भ की जाना है। प्रत्येक स्कूल से आठवीं-नवमीं में अध्यनरत  20-20 छात्र-छात्राओं का चयन कर सम्मलित किया जायेगा।

पुलिस अधीक्षक जबलपुर श्री अमित सिंह (भा.पु.से. ) ने बताया कि योजना का मुख्य उद्देश्य स्कूल विद्यार्थियो में व्यक्तित्व विकास, मूल अधिकार एवं नैतिक कार्तव्यों का पालन कर कानूनी प्रावधानों के साथ नागरिकों के सम्मान की रक्षा करना और सामाजिक दायित्व के लिये जिम्मेदार, अनुशासित , संस्कारिक और चरित्रवान नागरिक बनाना है इससे स्कूलो मे विद्यार्थी एवं पुलिस के बीच सामंजस्य की शुरूआत होगी।

इस योजना अन्तर्गत विद्यार्थियो के लिये BPR&D के द्वारा पाठ्यक्रम तैयार किया गया है,  BPR&D  की साईट पर SPC की  Handbook तथा अन्य जानकारी उपलब्ध है। प्रत्येक राज्य अपनी संस्कृति और परम्परा के आधार पर कोर्स में आवश्यक परिवर्तन कर सकते है, निर्धारित विषयों पर स्थानीय विशेषज्ञों, शिक्षाविदों, सेवा निवृत्त अधिकारी के माध्यम से प्रशिक्षित किया जावेगा।

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