स्तन कैंसर से बचने के लिए ये हैं सही तरीके : पं. विनोद मिश्रा

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आयुर्वेद के अनुसार कैंसर (कर्क रोग) सिर्फ 3 तरह का होता है रक्त कैंसर ,हड्डी कैंसर और मांस का कैंसर। आयुर्वेद में इसे कर्करोग भी कहा जाता है।

भारत में बीते एक दशक में स्तन कैंसर के मामले कई गुना बढ़ गए हैं। स्तन कैंसर पश्चिमी देशों की तुलना में भारतीय महिलाओं को कम उम्र में भी शिकार बना रहा है। भारतीय औरतों में स्तन कैंसर होने की औसत उम्र लगभग 47 साल है, जो कि पश्चिमी देशों के मुकाबले 10 साल कम है। सही जानकारी, जागरुकता, थोड़ी सी सावधानी और समय पर इसके लक्षणों की पहचान और इलाज से इस समस्या को हराया जा सकता है।
*आयुर्वेद चिकित्सक पं विनोद मिश्रा* ने कहा, यह एक ऐसी बीमारी है, जिसका पता लगाकर जड़ से खत्म किया जा सकता है। इसके लिए इसका पता लगाना बहुत जरूरी है और इसके लिए शुरुआती जागरुकता बहुत जरूरी है। इसके लिए हर औरत को अपने आप अपने स्तनों की जांच करनी चाहिए और किसी भी प्रकार की असामान्य स्थिति में इसकी डॉक्टरी जांच करानी चाहिए। महिलाओं को महीने में एक बार स्तन की जांच करनी चाहिए।
 इसे लेकर आयुर्वेद चिकित्सक मिश्रा ने कहा, एक महिला अपने स्तन को अच्छी तरह जानती है। मसलन, उसका आकार क्या है, इत्यादि। अगर स्वत: जांच के दौरान किसी भी प्रकार की असामान्य बात नजर आती है तो उसकी जांच होनी चाहिए। इस समस्या को टालने से बढ़ जाएगी और इसके बाद एक महिला को उसी के लिए लम्बा इलाज करना होगा।
*स्वत: जांच का सबसे अच्छा समय क्या होता है?*
 जिन महिलाओं में माहवारी आ रही है, वे माहवारी शुरू होने के 10 दिन बाद और जिनकी माहवारी बंद हो गई है, वे महीने में एक दिन तय करें लें और जांच करें। दाहिने हाथ से बायां स्तन और बाएं हाथ से दाहिन स्तन गोल-गोल घुमाकर देखें और अगर कोई भी असामान्य बात नजर आती है, मसलन किसी भी प्रकार का दर्द या फिर निपल्स से किसी भी प्रकार सा स्राव होता है तो इसकी तुरंत डॉक्टर से जांच कराएं।*
आयुर्वेद चिकित्सक के मुताबिक जो महिलाएं 40 साल पार कर गई हैं, उन्हें साल मे एक बार मैमोग्राफी करानी चाहिए। इस जांच से इस बीमारी का उस समय पता चलता है, जब आपको किसी भी प्रकार की समस्या का अहसास नहीं हो रहा होता है। अगर आपने किसी भी प्रकार की गांठ को नजरअंदाज किया तो वह कैंसर का रूप ले सकता है।स्वत: जांच से इस बीमारी का बिना किसी चिकित्सकीय निरीक्षण के पता लगाया जा सकता है और समय रहते इसका आयुर्वेदिक इलाज कराया जा सकता है। *यहां मैं बताना चाहूं कि मैमोग्राफी के दौरान कीमोथैरेपी लेना बहुत ज्यादा खतरनाक होता है, इसलिए कोशिश करें की आयुर्वेदिक चिकित्सा ही कराएं*
*स्तन कैंसर कैसे होता है?*  इसे लेकर आयुर्वेद चिकित्सक पं विनोद मिश्रा ने कहा, यह एक पॉलीसाइक्लिक एरोमैटिक हाइड्रोकार्बन नाम का एक कम्पाउंड है। *ये खाने के पदार्थो, मेकअप के सामानों में,पालीश कास्मेटिक्स आदिवासी में पाज जाते हैं*। इनका स्तन कैंसर से सीधा सम्बंध है। यह दुनिया भर में होता है। *स्तन कैंसर का दूसरा कारण है फास्ट फूड का बढ़ता चलन*
*आपको किसी भी प्रकार का बदलाव नजर आए तो सावधान हो जाइए। स्तन के स्किन के ऊपर कुछ भी असामान्य नजर आए तो सावधान हो जाइए। सबसे जरूरी बात, अगर निपल से बिना छुए कोई तरल पदार्थ निकल रहा है तो उसे गम्भीरता से लीजिए। इसे कभी नजरअंदाज मत कीजिए
*विशेष बात:- कैंसर के इलाज हेतु कभी भी अंग्रेजी दवाइयों वाली कीमोथैरेपी ना ले इसमें आयुर्वेदिक कीमोथैरेपी ही ले जिससे कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता।*
*आयुर्वेदिक परामर्श व कीमोथैरेपी हेतु संपर्क करें*
 पं. विनोद मिश्रा
*(नाड़ी वैद्य- आयुर्वेद एवं प्राकृतिक चिकित्सक)*
                   👉* 9827334608 , 8770448757 *
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   *आरोग्य सेवा शोध एवं कल्याण संस्थान भोपाल मध्य प्रदेश*
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