वीआर्ईपी कोटे से रेल टिकट कन्फर्म कराना अब आसान नहीं, फर्जीवाड़ा रोकने रेलवे ने बदले नियम

0
133
Spread the love

TOC NEWS @ www.tocnews.com

जबलपुर – अति विशिष्ट (वीआईपी) लोगों के नाम से फर्जी लेटर हेड लगाकर रेलवे की टिकट कन्फर्म कराने के नाम पर चल रहे गोरखधंधे पर रोक लगाने के लिए रेलवे बोर्ड ने नियमों में बदलाव करने का निर्णय लिया है, जिसके तहत अब वीआई कोटे से टिकट कन्फर्म कराने के लिए आवेदन के साथ जो यात्री यात्रा कर रहा है, उसका आधार कार्ड भी जरूरी होगा।

उल्लेखनीय है कि लगभग तीन माह पहले पश्चिम मध्य रेलवे के कोटो में आरपीएफ ने एक ऐसे गिरोह का पर्दाफाश किया था, जो अति विशिष्य यहां तक कि रेलमंत्री के नाम तक का फर्जी लेटर बनाकर टिकट कन्फर्म कराने का काम करता था।इस गिरोह की कारगुजारियां इतना ज्यादा बढ़ गई थीं कि सीधे डीआरएम को फोन करके अति विशिष्ट व्यक्ति का खास बताकर टिकट कन्फर्म करने को कहते थे।

कोटा मंडल के डीआरएम ने इस मामले की जांच के लिए आरपीएफ को कहा था, जिसके बाद जब जांच शुरू हुई तो गुजरात से इसके तार जुड़े मिले, जो कई गाडिय़ों में वीआईपी के नाम से फर्जी लेटर हेड तैयार करके टिकट कन्फर्म कराते थे. इस तरह की घटना अन्य रेल जोनों में भी सामने आयी, जिसके बाद रेलवे बोर्ड ने नियमों में बदलाव करने का निर्णय लिया है।

आवेदन के साथ लगाना होगा आधार कार्ड की कॉपी

रेलवे बोर्ड ने जो नया दिशा-निर्देश सभी रेल जोनों को जारी किया है, उसके मुताबिक वीआईपी कोटा के आवेदन के साथ संबंधित यात्री का आधार कार्ड भी लगाना होगा, ताकि किसी तरह का संदेह होने पर उसकी जांच की जा सके. इस व्यवस्ता से फर्जी लेटरपेड से ट्रेन में वीआईपी बर्थ के लिए कोटा लगाने वालों का पता लगाया जा सकेगा।

विजिलेंस की जांच में कई खामियां हुई थी उजागर

बताया जाता है कि इस गोरखधंधे की जांच रेलवे बोर्ड व जोनल रेलवे की विजिलेंस टीमों द्वारा पिछले कई दिनों से क4 जाती रही है, जिसमें कुछ मुख्य ट्रेनों में वीआईपी कोटे की बर्थ कंफर्म कराने के लिए कभी-कभी एक ही बर्थ के लिए एक ही जनप्रतिनिधि के कई लेटर लगे मिले, इसके बाद जांच टीम ने पूरे मामले की तहकीकात की, जिसमें खुलासा हुआ कि ये फर्जी है. वीआईपी के फर्जी लेटर बनवा कर ट्रेन की बर्थ का दुरुपगोय करते हैं और जरूरतमंद को बर्थ नहीं मिल पाती है।

यह है रेलवे में वीआईपी कोटा

रेलवे में लगभग सभी ट्रेनों में वीआईपी कोटा होता है, यह वह कोटा होता है, जो रिजर्वेशन सेंटर्स या ऑनलाइन आरक्षण कराने पर वेटिंग लिस्ट होने के बावजूद बचा रहता है. इस वीआईपी कोटे को विशेष आकस्मिक स्थिति में यात्रा करने वाले जरूरमंदों को आवंटित किया जाता है. जिसमें कैंसर रोगी, मंत्री, सांसद, न्यायाधीश, विधायक, स्वतंत्रता संग्राम सेनानी व अन्य लोगों को मिलता है।

ट्रेन में वीआईपी कोटे की बर्थ लेने के लिए यात्री को संबंधित वीआईपी का लेटर भी निर्धारित लेटर हेड पर लगाना होता है. ट्रेन का रिजर्वेशन चार्ट तैयार होने के दौरान प्राथमिकता के आधार पर वीआईपी कोटे की बर्थ आवेदकों को बुक की जाती है. रेलवे बोर्ड के संज्ञान में आया कि बड़े दलाल फर्जी लेटर लगाकर वीआईपी कोटे का दुरुपयोग कर रहे हैं, जिसके बाद नई व्यवस्था लागू की गई है।

कोई जवाब दें