निगम कर्मचारी को मप्र शासन के जनसंपर्क संचालनालय ने अधिमान पत्रकार बना दिया, अधिमान्य पत्रकार का कार्ड बरामद

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TOC NEWS @ www.tocnews.org

इंदौर। मध्यप्रदेश की शिवराज सिंह सरकार ने मीडिया को मजाक बनाकर रख दिया। लगभग हर भाजपा नेता और काले कारोबारी के पास से मप्र शासन द्वारा जारी पत्रकार कार्ड मिल रहा है। अब तक करीब एक दर्जन ऐसे लोगों के मामले सामने आ चुके हैं। ताजा मामला नगरनिगम के चतुर्थ श्रेणी बेलदार का है।

करोड़ों की संपत्ति का मालिक असलम खान सरकारी कर्मचारी है परंतु मप्र शासन के जनसंपर्क संचालनालय से उसे पत्रकार कार्ड जारी कर रखा है। उसके पास से अधिमान्य पत्रकार का कार्ड बरामद हुआ है। इसी संचालनालय से पहले भाजपा और आरएसएस नेताओं के पत्रकार कार्ड जारी हुए थे। अब काले कारोबारी और अपराधियों के पास भी सरकारी पत्रकार कार्ड मिल रहे हैं।

घर में मिला सरकारी दस्तावेजों का भंडार

लोकायुक्त सूत्रों के अनुसार चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारी असलम खान और उसके भाईयों के घर से लगभग 30 हजार पेज के सरकारी दस्तावेज मिले हैं जिन्हें जब्त कर लिया गया है। लोकायुक्त पुलिस के अनुसार असलम और उसके भाईयों के घर इतनी बड़ी तादात में सरकारी फाइलें कैसे पहुंची इसकी जांच की जा रही है। फाइलों को असलम के घर पहुंचाने में निगम के जिन कर्मचारियों और अफसरों का हाथ होगा उनके खिलाफ भी कार्रवाई की जाएगी। लोकायुक्त छापे में 18 हजार वेतन वाला निगम बेलदार 25 करोड़ का आसामी निकला था।

मप्र शासन का अधिमान्य पत्रकार कार्ड मिला

18 हजार रुपए प्रतिमाह की तनख्वा पाने वाले निगम बेलदार असलम के नाम का ‘अधिमान्य पत्रकार कार्ड’ भी मिला है। जनसंपर्क संचालनालय भोपाल द्वारा जारी इस कार्ड में असलम को अधिमान्य पत्रकार बताया गया है, जबकि वो तो चतुर्थ श्रेणी का सरकारी कर्मचारी है और सेवा नियमों के अनुसार सरकारी कर्मचारी पत्रकार नहीं हो सकता। लोकायुक्त पुलिस का कहना है कि इस कार्ड की जांच की जा रही है। देखना रोचक होगा कि क्या लोकायुक्त पुलिस उस मीडिया संस्थान के मालिक जिसने असलम खान को अपना पत्रकार बताया, और जनसंपर्क संचालनालय के उन अधिकारियों जो अधिमान्य पत्रकार का कार्ड जारी करते हैं, के खिलाफ कोई कार्रवाई करने की हिम्मत दिखा पाएगा।

पत्नी के नाम भी निकली कंपनी

असलम के भाई के नाम तीन कंपनियों के साथ ही भाई की पत्नी के नाम भी एक कंपनी है। अल्फा एसोसिएटेड, मेट्रो कंस्ट्रक्शन, ईश्वर इंटरप्राइजेज व अवान इंटरप्राइजेज भाई के नाम और श्री लक्ष्मी इंटरप्राइजेज पत्नी के नाम पर है। इन कंपनियों के माध्यम से बिल्डिंग परमिशन और कंस्लटेंसी जैसे काम किए जाते थे। इन कंपनियों में असलम उसके भाई के अलावा कुछ और पार्टनर भी है जो इसकी आड़ में पैसा बनाते थे। जांच में यह भी पता चला कि दो करोड़ की जिस बहुमंजिला के लिए असलम जिससे सौदा करने वाला था, उसका नाम फैजल है जो बिल्डर बताया जाता है। असलम ने उसे नकद पैसे भी दिए थे।

15 खातों की जांच

लोकायुक्त एसपी दिलीप सोनी के मुताबिक, एक्सिस बैंक में असलम व उसके परिजनों के 15 खातों की जांच की। इसमें पता चला कि कभी पत्नी, कभी मां या बेटियों के खातों में एक से आठ लाख रुपए नकद जमा होते थे। पत्नी राहेला के खाते में 29 सितंबर 2016 को भी आठ लाख रुपए जमा हुए थे। एक्सिस बैंक (सपना-संगीता रोड), एसबीआई (नगर निगम शाखा), सेंट्रल बैंक आॅफ इंडिया (चोइथराम अस्पताल परिसर), पंजाब एंड सिंध बैंक (पीवाय रोड), सेट बैंक (रेसकोर्स रोड) व यूनियन बैंक आॅफ इंडिया (आईके कालेज पलासिया शाखा) में भी उसके व परिजनों के खाते होने की सूचना है। सभी बैंकों से जानकारी मांगी है।

कैसे पहुंची सरकारी फाइल, इसकी हो रही जांच

छापे में असलम और उसके भाईयों के घर से नगर निगम की कई फाइलें जब्त की गई थी। यह फाइलें निगम के उद्यान विभाग, जनकार्य विभाग के साथ ही टीएनसीपी से संबंधित थी। सूत्रों का कहना है कि असलम अपने घर से सामानांतर निगम का नक्शा विभाग चलाता था। घर पर ही बिल्डर उससे मिलने आते थे और वहीं पैसा लेकर सारे काम कर दिए जाते थे। उसके घर से मिली सरकारी फाइलें वहां कैसे आई फिलहाल इसकी जांच की जा रही है।

अफसरों के नाम पर भी करता था कमीशनखाेरी

असलम ने नक्शा विभाग के सभी कर्मचारियों के साथ ही अधिकारियों को भी साध रखा था। अफसरों के नाम से बिल्डरों से वह डील कर लेता था और दोनों तरफ से रिश्वत लेेता था। इसके साथ ही निगम के बीओ और बीआई से उसने ऐसी सेटिंग जमा रखी थी की उसका काम कहीं नहीं अटकता था। एसपी के अनुसार असलम के एक्सिस बैंक और एसबीआई बैंक में 15 से अधिक खाते मिले है। इन खातों में 15 से 20 लाख रुपए जमा है। पैसों का बड़ा लेन देन करने के बाद वह खातों को बंद कर देता था। ऐसे लगभग 8 खातों की जानकारी हाथ लगी है। इसके साथ ही वह बगैर सरकारी अनुमति के एक बार सऊदी अरब और एक बार सिंगापुर की यात्रा कर चुका है।

फेसबुक पर खुद को बताया इंजीनियर

अफसरों के मुताबिक असलम की फेसबुक प्रोफाइल के मुताबिक उसने1993 में होलकर साइंस कॉलेज बेंगलुरू से पढ़ाई पूरी की जबकि वहां इस नाम का कॉलेज ही नहीं है। अफसरों का कहना है असलम ने सिविल इंजीनियरिंग की होती तो वह निगम में बेलदारी नहीं करता। वह दिनभर सहायक इंजीनियर स्तर के भवन अधिकारी के साथ गाड़ी में घूमता है। असलम करोड़ों का आसामी निकला, पर उसने इनकम टैक्स रिटर्न दाखिल नहीं किया, क्योंकि उसकी सालाना आय ही 2 लाख 28 हजार रुपए है।

‘मि. एक्स’ ने की थी शिकायत

शिकायतकर्ता ने ट्रिपल एक्स नाम से आवेदन दिया था। उसने असलम के छह-सात प्लॉट-मकान की जानकारी देते हुए कहा था यह सब अवैध कमाई से बनाए गए हैं। उसकी निगम में अफसरों से इतनी सेटिंग है कि किसी का भी नक्शा पास करवा देता है। लोकायुक्त अफसरों ने आवेदन पर दर्ज मोबाइल नंबर से शिकायतकर्ता को बयान के लिए बुलाया तो उसने खुद को प्रॉपर्टी व्यवसायी बताया था। शिकायतकर्ता ने कहा था असलम ने बिल्डिंग कंस्ट्रक्शन के लाइसेंस फर्जी नाम से ले रखे हैं और उन पर वह खुद दस्तखत करता है।

निगम इतना मेहरबान कि बंगले का संपत्तिकर सिर्फ 1300

जांच में पता चला है कि असलम ने सालाना 30 हजार से ज्यादा संपत्तिकर की भी चोरी की है। वह मकान नंबर 129 का टैक्स 1335 और मकान नंबर 130 का टैक्स 1428 रुपए ही चुकाता था, जबकि नियमानुसार इन दोनों मकानों का संपत्ति कर सालाना 30 हजार के करीब होता है।

नक्शे पास अफसर करते थे, केंद्र में था असलम

बड़ा सवाल यह है कि असलम ने एक भी नक्शा पास नहीं किया तो उसके पास इतनी संपत्ति कैसे आई? ऐसे में जो अफसर नक्शे पास करते हैं, उन पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई? असलम को तत्कालीन निगमायुक्त सीबी सिंह ने तीन और मनीष सिंह ने एक बार सस्पेंड किया। मनीष सिंह ने टीप लिखी थी कि असलम भवन निर्माताओं से सांठगांठ कर अनुज्ञा संबंधी कार्य निजी लाभ के लिए कराता है, जबकि भवन अनुज्ञा से संबंधित कोई दायित्व उसके पास नहीं।

बिल्डिंग परमिशन से जुड़े कामकाज में माहिर

लोकायुक्त पुलिस की कार्रवाई के दायरे में आया नगर निगम का चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी व बेलदार मोहम्मद असलम खान निगम की नक्शा शाखा में जाते ही नियम-कायदों का जानकार बन गया था। बिल्डिंग परमिशन से जुड़े कामकाज में वह इतना माहिर हो गया था कि नक्शा मंजूरी के लिए वह जहां कहीं बुलाता, अफसर वहीं पहुंच जाते थे।

17 अप्रैल को भी किया था सस्पेंड

इसी साल 17 अप्रैल को तत्कालीन निगमायुक्त मनीष सिंह ने असलम को इन्हीं गड़बड़ियों के कारण सस्पेंड कर ट्रेंचिंग ग्राउंड में पदस्थ कर दिया था। सिंह ने आदेश में लिखा था कि असलम भवन निर्माताओं के साथ सांठगांठ करते हुए भवन अनुज्ञा संबंधी कार्य निजी लाभ के आधार पर कराता है, जबकि भवन अनुज्ञा से संबंधित कोई भी दायित्व इसे नहीं सौंपा गया है। असलम बिल्डिंग परमिशन शाखा में बिना अनुमति जाता है, जबकि दूसरे विभाग के कर्मचारियों का यहां जाना प्रतिबंधित है। साथ ही सभी बिल्डिंग अफसर (बीओ), बिल्डिंग इंस्पेक्टर (बीआई) को नोट लिखा था कि भविष्य में असलम को भवन अनुज्ञा से संबंधित किसी भी तरह का सहयोग नहीं किया जाए। इतना ही नहीं, असलम का जिस सुतार गली में ऑफिस था, वहां भी जांच करवाई गई थी।

असलम मध्यस्थ रहा, जिन्होंने उसके जरिए कमाया, उन पर कार्रवाई क्यों नहीं?

असलम मध्यस्थता करता था, लेकिन निगम ने इस सिस्टम को क्यों बर्दाश्त किया? शासन भी ऑनलाइन सिस्टम को पूरी तरह प्रभावी नहीं बना पाया। यही कारण रहा कि ऑनलाइन सिस्टम भी पूरी तरह से मैन्युअल वर्किंग पर ही निर्भर है। एक बड़ा तथ्य यह भी है कि अब तक के निगमायुक्त और महापौर भी जानते थे कि इसी बिल्डिंग परमिशन सिस्टम में गड़बड़ होती है, लेकिन हुआ कुछ नहीं। लोकायुक्त एक भी अफसर पर कार्रवाई नहीं कर सका।

आलोक नगर में एक दिन में पास किए थे 22 नक्शे

आठ साल पहले कनाड़िया रोड स्थित आलोक नगर को लेकर निगम में शिकायत हुई थी। अधिकारियों ने एक ही दिन में वहां के 22 नक्शों को एक साथ पास कर दिया था। मामला लोकायुक्त में गया। जांच हुई और निगम ने भी अपने स्तर पर दिखाने के लिए कार्रवाई की। इसी तरह सिटी हार्ट सहित कई बिल्डिंग के मामले हैं, जिन्हें लेकर पूर्व पार्षद परमानंद सिसौदिया सहित कई लोग शिकायतें कर चुके हैं। फिर भी भवन अधिकारियों या निरीक्षकों पर कभी कोई कार्रवाई नहीं हुई।

भूमाफिया को सहयोग करने पर 8 साल पहले पुलिस कर चुकी पूछताछ

भूमाफिया को सहयोग करने के मामले में तुकोगंज पुलिस असलम से वर्ष 2010 में पूछताछ भी कर चुकी है। तब पुलिस ने उसे घर से उठाकर कुछ दिन तक थाने में बैठाया था। वह सालों नक्शा शाखा में भी रहा। धीरे-धीरे भूमाफिया और बिल्डरों का काम कराने लग गया। उसने शहर की कई बड़ी मल्टियों के नक्शे पास कराए। उसी भूमाफिया की कॉलोनी में भी आरोपी का एक प्लॉट मिला है। असलम का भाई इकबाल नगर निगम में स्वास्थ्य विभाग में पदस्थ है और एजाज नगर निगम में ही कॉन्ट्रैक्टर है। हालांकि दोनों भाइयों के नाम एफआईआर में फिलहाल नहीं है। असलम की तीन बेटियां हैं। एक बेटी अरबिंदो मेडिकल कॉलेज में एमबीबीएस कर रही है और दूसरी बेटी सेंट रेफियल्स स्कूल में पढ़ती है।

ये मिला था छापे में

  • 2 किलो साेने के गहने, सोने के 11 बिस्किट
  • 25 लाख रुपए नगद
  • 5 मकान अशोका कॉलोनी में, 1 फ्लैट, 1 मकान पत्नी के नाम
  • 1.512 हेक्टेयर जमीन, ऑफिस आैर दुकान, 3 कारें भी
  • पत्नी के नाम स्कीम 103, राजगृही कॉलोनी, साकेत में 1-1, सुखलिया में 4 प्लॉट
  • पत्नी के नाम ही साउथ तुकाेगंज में दुकान, सुभाष मार्ग, सुतार गली में फ्लैट
  • स्कीम 136 में भाई, पीपल्याहाना में मां, जावरा में खुद के नाम पर प्लॉट
  • लाखों के बकरे
  • स्कीम 54 में प्लॉट, ऑफिस
  • देवास के कमलापुर और महू के चिकली जमीन मिली है

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