बच्चियों एवं महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराध मानवता के लिये गंभीर कृत्य है : कमिश्नर उमराव

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TOC NEWS @ www.tocnews.org

होशंगाबाद | 11-जुलाई-2018. महिलाओं एवं बालिकाओं के विरुद्ध यौन अपराधों की रोकथाम के लिये संभाग स्तरीय प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन जिला पंचायत सभागार में किया गया। कार्यशाला में नर्मदापुरम संभाग कमिश्नर श्री उमाकांत उमराव ने कहा कि समाज में महिलाओं एवं बालिकाओं के विरुद्ध वर्तमान मे घटित अपराधो एवं यौन शोषण से संबंधित घटनाओं की रोकथाम के लिये ग्राम स्तर पर आंगनबाडी कार्यकर्ता, शौर्यादल सदस्य, शिक्षक एवं समाज सेवी संस्थाओं को ऐसे परिवारों का चिन्हांकन करने की जिम्मेदारी दी गई है.

जहां इस तरह की घटनाएं पूर्व में घटित हुई हैं या घटित हो सकती है। ग्राम के असामाजिक तत्वों एवं विकृत मानसिकता के व्यक्तियों की सूची तैयार करने के निर्देश दिये गये हैं। उन्होंने कहा कि गांव में ऐसे परिवारों को चिन्हित करने की आवश्यकता है जहां पति-पत्नि अपने बच्चों को घर पर अकेले अथवा किसी रिश्तेदार के घर छोडकर चले जाते हैं। ऐसे परिवारों को यह सलाह देनी चाहिए कि वे अपने बच्चों को ऐसे परिवारों में छोडकर जाएं जहां बुजुर्ग सदस्य हों एवं परिवार में बालिकाएं भी हो ताकि बच्चे सुरक्षित वातावरण में रहे। शाम को कार्य से वापस आने के बाद बच्चो से दिनभर की संपूर्ण गतिविधियों के बारे में जानकारी ले।

कमिश्नर श्री उमराव ने कहा कि बालिकाओं के स्कूल के आसपास अनावश्यक रूप से भ्रमण करने वाले असामाजिक तत्वों की सूची तैयार करें एवं इस कार्य में ऑटो रिक्शा चालक, दुकान वाले, शौर्या दल सदस्य एवं समाज के प्रभावशाली व्यक्तियों की सहायता प्राप्त करे। उन्होंने कहा कि अपने क्षेत्र में घटित घटनाओं के संबंध मे तत्काल पुलिस विभाग को सूचित करें। सभी के सहयोग से ही समाज में महिलाओं एवं बच्चियों के लिये सुरक्षित एवं भयमुक्त वातावरण का निर्माण किया जा सकता है। कमिश्नर श्री उमराव ने कहा कि इस प्रकार की घटनाएं समाज में मानवता के विरुद्ध गंभीर कृत्य है। उन्होनें उपस्थित लोगों को महिलाओं और बेटियो के लिये एक सशक्त, प्रगतिशील एवं सुरक्षित समाज की कल्पना को साकार करने का संकल्प दिलाया।

कार्यशाला में होशंगाबाद जोन के पुलिस महानिरीक्षक श्री केसी जैन ने कहा कि पुलिस विभाग के माध्यम से इस प्रकार की घटनाओं को रोकने के प्रयास किये जा रहे हैं। उन्होंने बैतूल जिले के अधिकारियों को निर्देशित किया कि वहां पलायन अधिक होने के कारण महिलाओं एवं बालिकाओं की सुरक्षा पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है। पुलिस अधीक्षक श्री अरविन्द सक्सेना द्वारा महिलाओं के विरुद्ध होने वाले अपराधों के नियंत्रण के लिये कानूनी धाराओं के बारे में अवगत कराते हुए बताया गया कि समाज में घटित होने वाले अपराधों को नियंत्रित करने के लिये पुलिस पूरी तरह प्रतिबद्ध है।

इस प्रकार की घटना घटित होने पर पुलिस को अनिवार्यत: अवगत कराएं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में बच्चों में कम उम्र में गलत आदतों का अनुसरण करने के कारण भी इस तरह की घटनाओ की संभावना अधिक रहती है। अत: बच्चों के साथ परिवार में संवादयुक्त वातावरण निर्मित करें ताकि बच्चे अपने भविष्य के प्रति सजग रहे। कार्यशाला में यूनिसेफ के प्रतिनिधि श्री प्रशांत दुबे द्वारा 18 वर्ष से कम आयु के बालक बालिकाओं के विरुद्ध होने वाले यौन शोषण के संबंध में प्रदेश में घटित घटनाओं के माध्यम से विस्तार से बताया गया।

श्री दुबे ने बच्चों के लैंगिक शोषण से बचाव हेतु पॉक्सो एक्ट की धाराओं, अपराधियों को मिलने वाले दण्ड आदि के बारे में जानकारी प्रदान की गई। साथ ही लैंगिक शोषण से बचाव हेतु बाल कल्याण समिति, बाल संरक्षण अधिकारी आदि के दायित्वों के संबंध में सारगर्भित प्रशिक्षण दिया गया।कार्यशाला में कलेक्टर प्रियंका दास, जिला पंचायत के मुख्य कार्य पालन अधिकारी श्री पीसी शर्मा, किशोर न्याय बोर्ड के प्रधान मजिस्ट्रेट श्री विजय कुमार पाठक, उप संचालक महिला सशक्तिकरण श्रीमती मोहिनी जाधव, अन्य संबंधित अधिकारीगण एवं स्वयंसेवी संस्थाओं के सदस्य उपस्थित रहे।

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