जनसंपर्क के संचालक का जिम्मा आईपीएस अफसर और एसपी रहे अफसर को सौंपा, आखिर कौन है ये अधिकारी

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TOC NEWS @ www.tocnews.org

  • इस विभाग के जिम्मे है मुख्यमंत्री की फेस ब्रांडिंग
  • अब मुख्यमंत्री के चेहरे की चमक बनाए रखने के लिए काम करेगा उनका दामाद

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने एक बड़ा फेरबदल करते हुए आईपीएस अधिकारी आशुतोष प्रताप सिंह को संचालक जनसंपर्क की जिम्मेदारी सौंपी है। यह शायद पहला मौका है जब किसी आईपीएस को संचालक की जिम्मेदारी दी गई है। उससे भी महत्वपूर्ण यह है कि आशुतोष मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान के भांजे दामाद हैं और होशंगाबाद में एसपी भी रह चुके हैं। अब उनके पास मुख्यमंत्री के चेहरे की ब्रांडिंग करने का जिम्मा होगा।

आईपीएस अधिकारी आशुतोष प्रताप सिंह के लिए इमेज परिणाम

2010 बैच के आईपीएस अफसर आशुतोष प्रताप सिंह जनसंपर्क विभाग के संचालक होंगे।

दरअसल, संचालक पद को लेकर जनसंपर्क के भीतर काफी समय से घमासान चल रही थी। इस पद से अनिल माथुर रिटायर हो चुके थे, लेकिन विवाद की वजह से उन्हें लगातार सेवावृद्धि देकर बरकरार रखा हुआ था। अचानक से बदले घटनाक्रम में सरकार ने आशुतोष प्रताप सिंह को संचालक जनसंपर्क का जिम्मा दे दिया। इसके आदेश सामान्य प्रशासन विभाग ने जारी भी कर दिए हैं।

हालांकि इससे पहले भी आशुतोष को जनसंपर्क में लाने की चर्चा हुई थी। लेकिन उस समय कहा गया था कि संचालक के पद पर आशुतोष की नियुक्ति होगी और आयुक्त जनसंपर्क का पद खाली छोड़ दिया जाएगा। लेकिन उसी बीच में अचानक इंदौर कलेक्टर रहे पी नरहरि को आयुक्त जनसंपर्क का जिम्मा दे दिया गया था। उसके बाद इस बात की संभावना खत्म हो गई थी कि इस पर आशुतोष को लाया जाएगा।

लेकिन अचानक मंगलवार को सरकार ने आशुतोष को यह जिम्मेदारी दे दी और अनिल माथुर को सेवा से मुक्त कर दिया। इसके पीछे की वजहें भले ही उजागर नहीं हुई हों, लेकिन कहा जा रहा है कि मुख्यमंत्री जनसंपर्क के भीतर अपने भरोसे के लोगों को बैठाना चाहते हैं। उन्हें चुनावी साल में दूसरे लोगों पर भरोसा नहीं हो रहा है।

इतनी बड़ी फौज आखिर क्यों
इसके साथ ही एक और सवाल खड़ा होने लगा है कि जिस विभाग में कभी पहले सिर्फ एक सीपीआर मतलब आयुक्त जनसंपर्क हुआ करता था। अब विभाग में एक प्रमुख सचिव, एक आयुक्त और एक संचालक आईपीएस अधिकारी नियुक्त किया गया है। जबकि अपर संचालक स्तर के चार बड़े अधिकारी विभाग में पहले से मौजूद हैं, जिन्हें लगभग संचालक स्तर का ही माना जाता है।

इसके बाद आखिर सरकार को इतने अधिकारियों की जरूरत यहां पर क्यों हो रही है। हालांकि एक दलील यह भी दी जा रही है कि चुनावी साल में आशुतोष को फील्ड पोस्टिंग देने में सरकार को फायदा नहीं होगा, ऐसे में संचालक जनसंपर्क के तौर पर वह सरकार के लिए फायदे का सौदा हो सकते हैं। इसके साथ ही वह मुख्यमंत्री के परिवार से हैं, सो उनपर मुख्यमंत्री का भरोसा दूसरे अफसरों के मुकाबले ज्यादा होगा।

साभार- (शैलेन्द्र तिवारी)

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