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लाहौर: मुंबई आतंकवादी हमले पर विवादास्पद बयान देने के लिए अपदस्थ प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के खिलाफ देशद्रोह की कार्रवाई शुरू किए जाने के आग्रह संबंधी तीन याचिकाओं को गुरुवार को खारिज कर दिया और कहा कि ये याचिकाएं विचारणीय नहीं है. शरीफ ने सीमा पार करने और मुंबई में लोगों की ‘हत्या’ करने के लिए ‘सरकार से इतर तत्वों’ को इजाजत देने की पाकिस्तान की नीति पर पिछले सप्ताह एक इंटरव्यू में सवाल उठाया था.

शरीफ ने सार्वजनिक रूप से स्वीकार किया था कि देश में आतंकवादी संगठन सक्रिय है. शरीफ के इस बयान से एक बड़ा विवाद छिड़ गया था. राष्ट्रीय सुरक्षा समिति ने मुंबई आतंकवादी हमले के बारे में शरीफ के ‘भ्रामक’ बयान की निंदा की थी और इसे ‘ गलत और भ्रामक ’’ बताया था.

लाहौर उच्च न्यायालय के न्यायमूर्ति मोहम्मद मिर्जा ने विपक्षी पाकिस्तान तहरीक – ए – इंसाफ ( पीटीआई ) और पाकिस्तानी आवामी तहरीक ( पीएटी ) और वकील अब्दुल्ला मलिक द्वारा दायर तीन याचिकाओं को खारिज कर दिया. याचिकाओं की सुनवाई के बाद न्यायमूर्ति मिर्जा ने कहा कि ये याचिकाएं विचारणीय नहीं है.

याचिकाकर्ताओं ने दलील दी थी कि शरीफ ने देश की छवि खराब की है.याचिकाकर्ताओं ने कहा ,‘‘ पूर्व प्रधानमंत्री के इस बयान से भारत का फायदा हुआ है और देश की सुरक्षा तथा हितों के प्रति पूर्वाग्रह नजर आता है और जाहिर है कि शरीफ देशद्रोह के साथ – साथ आधिकारिक गुप्त अधिनियम 1923 के प्रावधानों के तहत दोषी है. ’’ उन्होंने दलील दी कि शरीफ का बयान देश के खिलाफ ‘‘ देशद्रोह करना ’’ है.

शरीफ (68) पहले से ही पनामा पेपर्स मामले में भ्रष्टाचार के तीन मामलों का सामना कर रहे है. गत 12 मई को डॉन में शरीफ के साक्षात्कार को लेकर विपक्षी पार्टियों ने अदालत का रूख किया था.

2008 के मुंबई हमलों पर शरीफ के विवादास्पद बयान के लिए उनके खिलाफ देशद्रोह का मामला दर्ज किये जाने की मांग को लेकर देश की तीन प्रांतीय एसेंबलियों में शरीफ के खिलाफ प्रस्ताव भी लाए गए थे.

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