मध्यप्रदेश व राजस्थान में कांग्रेस से आई बड़ी खबर, शिवराज और वसुंधरा की बढ़ी परेशानी

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कांग्रेस पार्टी ने मध्यप्रदेश और राजस्थान के विधानसभा चुनाव में नए चेहरों को सीएम पद का उम्मीदवार बनाने का कर लिया है बड़ा फैसला, मध्यप्रदेश में दिग्विजय सिंह से किनारा करके ज्योतिरादित्य सिंधिया को बढ़ा दिया है आगे, राजस्थान में अशोक गहलोत को राष्ट्रीय राजनीति में भेजकर सचिव पायलट को मुख्यमंत्री का उम्मीदवार बनाने का दे दिया गया है संकेत, कांग्रेस के इस दांव से मध्यप्रदेश के सीएम शिवराज सिंह चौहान और राजस्थान की सीएम वसुंधरा राजे की बढ़ गई है परेशानी…

दिग्विजय सिंह मध्यप्रदेश के दो बार सीएम रह चुके हैं। इस बार उन्होंने मध्यप्रदेश में नर्मदा यात्रा निकाल कर एक तरह से सीएम की उम्मीदवारी पर अपनी दावेदारी ठोंक दी। लेकिन, कांग्रेस के अध्यक्ष राहुल गांधी ने उनके अभियान को अनदेखा करके ज्योतिरादित्य सिंधिया को आगे बढ़ा दिया। वैसे भी ज्योतिरादित्य सिंधिया हमेशा से राहुल गांधी के गुड बुक में रहे हैं। नया चेहरा होने की वजह से कांग्रेस से दूर हो गए वोटरों को जो़ड़ने में भी मदद मिलेगी। कांग्रेस के इस दांव से बचने के लिए मध्यप्रदेश में भाजपा सरकार के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को नए सिरे से रणनीति बनानी पड़ेगी।

राजस्थान में भी कांग्रेस ने कुछ दिनों पहले ही सीएम पद के तय उम्मीदवार माने जा रहे अशोक गहलोत को अचानक राष्ट्रीय महासचिव का पद देकर प्रदेश की राजनीति से अलग कर दिया है। अब गहलोत का ज्यादा समय राजस्थान से बाहर और खास करके दिल्ली में बीत रहा है। दूसरी ओर दिग्गज कांग्रेसी नेता स्व.राजेश पायलट के पुत्र सचिव पायलट को प्रदेश की कमान पूरी तरह से दे दी गई है। प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष सचिन इन दिनों राजस्थान में लगातार मेरा बूथ-मेरा गौरव कार्यक्रम चला रहे हैं।

वसुंधरा राजे और शिवराज सिंह चौहान (फोटो : गूगल)

विधानसभा के चुनावों में लगातार भाजपा से मात खाती जा रही कांग्रेस को मध्यप्रदेश और राजस्थान में अपने लिए अच्छे दिन का अहसास हो रहा है। भाजपा को भी वहां अपनी हालत पतली होने का अनुमान बखूबी है। अगर इन दोनों प्रदेशों को भाजपा गंवा देती है तो 2019 के लोकसभा चुनाव से पार्टी को अब तक का सबसे बड़ा झटका लगेगा। इसलिए कर्नाटक विधानसभा के चुनाव के बाद अमित शाह एंड टीम निश्चित रूप से कांग्रेस के नए दांव की काट की रणनीति बनाने में जुट जाएगी। इसमें दिग्विजय सिंह और अशोक गहलोत के समर्थकों की नाराजगी को भी भड़काने का पूरा-पूरा प्रयास होगा।

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