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बिहार . ‘मै तुम्हारा तबादला करा दूंगा… ऐसी जगह भेजूंगा कि तुम्हे… समझते क्या हो…, तुम्हारी औ**त क्या है…?’ अक्सर ऐसा आप खाकी के खिलाफ कुछ मंत्री, विधायकों को कहते हुए सुने होगे। लेकिन, ऐसा कोतवाल भी है जिसका ट्रांसफर करना तो बहुत दूर उसके सामने आने पर बड़े-बड़े अधिकारियों और माननीयों के पसीने छूट जाते हैं और सलाम करके वहां से चलते बनते हैं।

इनकी कुर्सी पर थाने का असली थानाध्यक्ष भी नहीं बैठता। जी हां! कहानी दिलचश्प है लेकिन कोतवाल ‘असली’ नहीं है। यह कहानी है वाराणसी के कोतवाली थाने की। जहां कोतवाल की कुर्सी पर खुद काल भैरव बैठे रहते हैं। यहां थानाध्यक्ष की असली कुर्सी पर काल भैरव और उनके बगल में एक टेंपरेरी कुर्सी रखकर खाकीधारी थानाध्यक्ष बैठकर लोगों की समस्याएं सुनते हैं। इस थाने की खास बात यह भी है कि यहां कोई शीर्ष अधिकारी निरीक्षण करने भी नहीं आता। मतलब आता है लेकिन बाबा को सलामी ठोककर और अपना काम करके चलता बनता है।

यहां डीएम और एसएसपी भी आते हैं अपने अधीनस्थ अधिकारियों से बात-चीत करते हैं उनके दुख:-सुख समस्य़ाएं पूछते हैं जनता की समस्याएं भी सुनते हैं लेकिन कोतवाल की असली कुर्सी पर काल भैरव बैठे रहते हैं और दूसरे अधिकारी जनता के साथ उनके दरबार में न्याय करते रहते हैं। काम खत्म करने के बाद बाबा को सलामी ठोककर ही अधिकारी थाने से निकलते हैं। आप कुर्सी देख सकते हैं, कुर्सी पर रखी तस्वीर भी देख रहे होंगे लेकिन क्या रौब है?

बाबा के लिए कुर्सी पर बाकायदा सफेद तौलिया बिछाया गया है। ये सब इसलिए क्योंकि ये साहब तो थाने के नाम के थानेदार हैं। कोतवाली के थानाध्यक्ष राजेश कुमार सिंह ने बताया कि हम बेशक नाम और काम दोनों के लिए थानाध्यक्ष हैं लेकिन थाने के असली इंचार्ज तो बाबा कालभैरव हैं। ये तस्वीर है काशी के विश्वेश्वर गंज थाने की। सालों से इस थाने के थानेदार तो बदलते रहे हैं। लेकिन अगर कुछ नहीं बदलता है तो वो है कुर्सी पर रखी बाबा काल भैरव की तस्वीर।

आपको जानकर हैरानी होगी कि आजतक इस थाने का निरीक्षण किसी DM या SSP ने नहीं किया है क्योंकि वो तो खुद ही अपनी ज्वॉइनिंग से पहले यहां आशीर्वाद लेने आते हैं और जिसे बाबा चाहते हैं वो नगरी में रहता है। वाराणसी के विश्वेश्वरगंज इलाके में ये परंपरा सालों से चली आ रही है। इस कोतवाली के नियम भी आस्था से भरे हैं। सुबह काम पर आते ही इस कोतवाली के पुलिस अधिकारी सबसे पहले बाबा काल भैरव के दर्शन कर उनका आशीर्वाद लेते हैं, फिर अपने-अपने काम पर निकलते हैं।

कोतवाली में बाबा कालभैरव की कुर्सी होने के पीछे ग्रंथों में लिखी कथा है। बाबा कालभैरव को काशी शहर का कोतवाल माना जाता है। कहते हैं कि यहां सबकुछ उन्हीं की मर्जी से होता है इसलिए हर बड़ा प्रशासनिक और पुलिस अधिकारी सबसे पहले बाबा के दर्शन कर उनसे शहर में रहने की इजाजत लेता है, उसके बाद अपना काम शुरू करता है।

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