उत्तर पश्चिम रेलवे की महिला अधिकारी अंशुल सारस्वत ने मुख्य कार्यालय अधीक्षक राजेंद्रसिंह को पीटा और रेल संगठन विभागीय कार्यवाही के बहाने मामले को दबा रहे हैं?

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लेखक: डॉ. पुरुषोत्त्म मीणा ‘निरंकुश’
उत्तर पश्चिम रेलवे मुख्यालय जयपुर में कार्यरत प्रथम श्रेणी महिला अधिकारी अंशुल सारस्वत ने 30 अगस्त, 2017 को तृतीय श्रेणी रेलकर्मी मुख्य कार्यालय अधीक्षक राजेंद्रसिंह को सार्वजनिक रूप से अपशब्द कहते हुए 2-3 थप्पड़ जड़ दिये। इस आपराधिक कृत्य की तत्काल पुलिस में रिपोर्ट करके महिला अधिकारी को गिरफ्तार करवाने के बजाय रेलवे कर्मचारी संगठन विभाग प्रमुख से महिला अधिकारी के खिलाफ कार्यवाही की मांग कर रहे हैं। अकसर रेलवे सहित सभी सरकारी विभागों में आपराधिक घटनाओं को इसी प्रकार से दबाया जाता है। जिन आपराधिक मामलों में आरोपियों को पुलिस की गिरफ्त और अन्तत: जेल में होना चाहिये, ऐसे मामलों को विभागीय स्तर पर भी रफादफा कर दिया जाता है। जिनमें उच्च अफसरशाही से साठगांठ रखने वाले रेलवे कर्मचारी संगठनों की प्रमुख भूमिका होती है। रेलकर्मरी संगठन कर्मचारियों के हितों की रक्षा के बजाय उच्चाधिकारियों के संरक्षण के लिये काम करते देखे जा सकते हैं।
प्रस्तुत आपराधिक मामले में पीड़ित मुख्य कार्यालय अधीक्षक राजेंद्रसिंह के सरकारी दायित्वों के ईमानदारी से निर्वाह करने में व्यवधान पैदा करने, पीड़ित की मानहानि करने और उसकी मारपीट करने सहित, अपनी पदस्थिति का दुरूपयोग करने के गम्भीर अपराध में महिला रेल आधिकारी के विरूद्ध तत्काल पुलिस में मामला पेश करके एफआईआर दर्ज करनी चाहिये। इसके बाद विभागीय अनुशासनहीनता की कार्यवाही तो रेल विभाग प्रमुख को करनी ही होगी और दोनों स्तर पर मामले चलेंगे। दोषी पाये जाने पर दोनों स्तर पर सजा भी भुगतनी होगी। लेकिन इस देश का दुर्भाग्य है कि अपने आप को पढे-लिखे कहने वाले, सरकारी बड़े बाबू उच्च पदस्थ रेल अफसरों से भयभीत, बल्कि आतंकित रहते हैं और रेलकर्मचारी संगठन विभागीय कार्यवाही के नाम पर उनको गुमराह करते रहते हैं। इस कारण मामले विभागीय स्तर पर ही दब जाते हैं। जिससे ऐसे उद्दंड और आपराधिक प्रवृत्ति के अफसरों के होंसले बुलन्द होते जाते हैं। जबकि इस मामले की पुलिस में रिपोर्ट करना पीड़ित का पहला अधिकार और दायित्व है। वहीं विभाग प्रमुख का भी पदीय दायित्व है, कि वह तुरंत पुलिस को रिपोर्ट पेश करें।

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