हम ऐसे करते थे लड़कियों के देह का सौदा

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ग्वालियर। मासूम बच्चियों को चुराने और फिर देह व्यापार के मकसद से उन्हें बेच देने वाला गैंग करीब चार साल तक ग्वालियर में काम करता रहा और पुलिस को भनक तक नहीं लगी। बीती 29 दिसंबर को जब गैंग की सरगना लक्ष्मी साईं बाबा मंदिर से बच्ची को चुराते हुए रंगे हाथ पकड़ी गई तो चैकाने वाले खुलासे हुए।


मुक्‍त कराई गईं 7 बच्‍चियां

बच्चियों को चुराने वाला ये गैंग ढाई से तीन साल की मासूम बच्‍चियों को चुराता था, फिर उन्हें पालपोस कर बड़ा करता था और मोटी रकम मिलने पर देह व्यापार के धंधे में धकेल देता था। पुलिस ने गैंग के 5 आरोपियों को गिरफ्तार किया है। जबकि 7 ऐसी बच्चियां बरामद हुई हैं, जिन्हें चुराने के बाद बेच दिया गया। फिलहाल पुलिस को तीन बच्चियों के परिजनों का पता चल चुका है। बाकी बच्चियों को उनके माता पिता तक पहुंचाने की कोशिश पुलिस ने शुरू कर दी है।

ग्वालियर में एसपी डॅा. आशीष ने देर शाम पत्रकार वार्ता में इस गैंग और इसकी कारगुजारियों का खुलासा किया। ग्वालियर पुलिस की गिरफ्त में आई लक्ष्मी देवी देखने में जितनी मासूम है। इसके गुनाह उतने ही काले। इसकी गैंग के बाकी साथियों में खुद इसके दो बेटे हैं जबकि बाकी अन्‍य दो बिचैलिये हैं। इन सभी ने वो अपराध किया है, जिसे जानकर आप भी गुस्‍से से भर उठेंगे।

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ऐसे चलता था गिरोह

गिरोह में सबसे अहम काम लक्ष्मी का था। लक्ष्मी पहले शहर के बस स्टैंड, स्टेशन या गरीब बस्तियों में जाकर उन बच्चियों को टारगेट करती थी जिनके माता पिता या तो घर से बाहर रहते थे या किसी वजह से बच्ची घर या मोहल्ले में अकेली खेलती थी। एक बार बच्ची टारगेट पर आ जाने के बाद लक्ष्मी उनसे चॉकलेट या फल खिलाने के जरिए पहचान बनाती और फिर मौका लगते ही उन्हें चुरा लेती…।

खिला-पिलाकर कर बच्‍चियों को करते थे बड़ा

एक बार बच्चा चोरी होने के बाद राजू और राजेश का काम शुरु होता था। राजू और राजेश लक्ष्मी के ही बेटे हैं। ये दोनों बच्चियों की परवरिश करते थे और तब तक खिलाते पिलाते थे जब तक की कोई ग्राहक इन्हें नहीं मिल जाता। मकसद यही होता था कि बच्चियों को इतना बडा कर लिया जाए कि देह व्यापार के लिहाज से मोटी रकम मिले।

30-40 हजार में तय होता था सौदा

इसके बाद शुरु होता था राम मिलन कंजर और रामनाथ बघेल का काम। ये दोनों लक्ष्मी से बच्चियों को लेते थे और फिर उन्हें बेच देते थे। बच्चियों की कीमत लगाई जाती थी 30 से 40 हजार रुपए तक। पुलिस को इनसे पूछताछ के बाद बेची गई सात बच्चियां मध्य प्रदेश और राजस्थान के अलग अलग ठिकानों से बरामद हुई हैं।

ग्‍वालियर पुलिस की गिरफ्त में आए बच्‍चियों का सौदा करने वाले
बच्‍चियां आरोपियों को ही समझती थीं अपना परिजन

पुलिस के मुताबिक ये गैंग शहर में करीब चार साल से काम कर रहा था और हैरानी की बात ये है कि कुछ बच्चियां तो इतनी कम उम्र में चुराई गईं कि वो आरोपियों को ही अपना परिजन समझती हैं। फिलहाल ग्वालियर पुलिस ने इस गैंग को 5 दिन के रिमांड पर लिया है। ताकि इनकी और काली करतूतों का पता लगाया जा सके।

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