हनुमान जी के द्वारा सूर्य को निगलने के पीछे क्या था कारण? पढ़ें पूरी कहानी

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पवन पुत्र हनुमानजी ने अपने बाल रूप में बहुत मस्ती की है, पर जब उन्होनें ये किया तो तीनों लोक में अँधेरा छा गया और भयानक त्रासदी हो गई थी। तीनों लोक में जीवन खत्म होने लगे थे, चारों तरफ हाहाकार मचा हुआ था।एक बार माता अंजनी हनुमानजी को सुलाकर कहीं बाहर गई हुई थी। उस समय जब बाल हनुमान अपनी नींद से जागे तो उनको बहुत भूख लगी। जब उन्होनें बाहर देखा तो उन्हें एक रसीला पीला फल दिखा, जिसे खाने को वे निकल पड़े। पर असल में वो फल नहीं सूर्य था। एक झटके में हनुमानजी ने उन्हें मुँह में ले लिया और खाने लग गए। जैसे-जैसे सूर्य हनुमानजी के मुँह में जाने लगा, चारो तरफ अँधेरा छा गया। उस समय सूर्य पर ग्रहण चल रहा था। पर हनुमानजी को जब तक कोई रोक पाता तब तक तो सूर्य भगवान उनके मुँह मे थे। और सब अपनी जान बचाने में लगे हुए थे।जब हनुमानजी सूर्य को खा रहे थे, उस समय राहु सूर्य को ग्रसने के लिए आ रहा था। हनुमानजी को लगा की वो कोई काला फल है, पर राहु हनुमान से अपनी जान बचाकर भाग निकला और देवराज इंद्र की शरण में चले गयाI डर के मारे काँपते हुए स्वर में राहु ने देवराज इन्द्र से कहा कि ‘हमे बचाएं’। इंद्र के पूछने पर राहु ने खा कि ये कौनसा दूसरा राहु सूर्य को ग्रसने के लिए भेज दिया। फिर क्या था देवराज इंद्र हैरान हो गए और लिए राहु की मदद के लिए निकल पड़े।
देवराज इन्द्र अपने सफेद हाथी, जिसमें उनका कवच, बड़ा धनुष, बाण और असीम शक्तियां थी, पर सवार होकर हाथ में वज्र लेकर स्वर्ग से बाहर निकले तो उन्होंने देखा कि एक छोटा सा वानर बालक भगवान सूर्य नारायण को अपने मुंह में दबाए आकाश में खेल रहा है। पर जब हनुमानजी की नज़र ऐरावत पर सवार इंद्र पर पड़ी तो उन्हें फिर से आभास हुआ कि यह कोई खाने लायक सफेद फल है। और नन्हे बजरंग बली अपना खेल छोड़ झटपट इंद्र की ओर लपक पड़े।
हनुमान को अपनी ओर आता देख इंद्र क्रोधित हो गए I अपनी और सूर्य की जान बचाने के लिए भगवान्ह इंद्र ने हनुमान पर प्रहार कर दिया। वज्र के तेज प्रहार से हनुमान का मुंह खुल गया और सूर्य भगवान बाहर आ गए। परंतु बाल हनुमान वज्र के तीव्र प्रहार से बेहोश होकर पृथ्वी पर गिर पड़े।

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