सेना का अपमान करने वाली फिल्म ‘बिना कट’ होगी रिलीज, जावड़ेकर सो रहे हैं

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अनिल कपूर और अनुराग कश्यप की फिल्म ‘एके वर्सेज एके’ रविवार को प्रदर्शित होने जा रही है। इस प्रदर्शन को केंद्र सरकार की पराजय कहना उचित होगा। भारतीय वायु सेना का अपमानजनक चित्रण करती इस फिल्म का रिलीज हो पाना दिखा रहा है कि राष्ट्रपति महोदय द्वारा ओटीटी पर नियंत्रण करने के लिए दिया गया कानून या तो किसी काम का नहीं है।या केंद्र के मंत्री बॉलीवुड से अत्याधिक स्नेह रखते हैं।

जब इस फिल्म का विवाद शुरु हुआ था, उसी समय इसके  निर्माता-निर्देशक आत्मविश्वास में थे कि फिल्म को केंद्र न रोक सकता है, न उन पर कोई दृश्य हटाने के लिए दबाव डाल सकता है। यदि केंद्र का कानून इतना लचर है कि वह सेना का अपमान करने वाली फिल्म पर रोक नहीं लगा सकता तो प्रधानमंत्री महोदय को इस कानून की समीक्षा करने की तुरंत आवश्यकता है।

केंद्र को मालूम हो कि नेटफ्लिक्स भारत के संविधान और कानून का उल्लंघन कर रहा है। ‘ए सूटेबल बॉय’ के विवाद के बाद ‘एके वर्सेज एके’ के प्रकरण से पता चलता है कि एक मूवी प्लेटफॉर्म इतना अनियंत्रित और स्वच्छंद है कि उसे भारत की सरकार की ओर से कार्रवाई का कोई डर नहीं है।

रविवार को जब ये फिल्म प्रदर्शित होगी तो ये न केवल भारतीय वायु सेना का घोर अपमान करेगी, बल्कि भारत की शक्तिशाली सरकार के सामने आइना रख देगी। इस आईने में केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर अपनी डरपोक छवि को निहार सकेंगे। केंद्र के सूचना व प्रसारण मंत्रालय की ढिठाई के कितने किस्से हैं और कितने बताए जाए।

ये सरकार ‘एके वर्सेज एके’ पर बैन लगाकर मनोरंजन उद्योग को चेतावनी भरा संदेश क्यों नहीं देना चाहती है? इस सरकार को कितनी बार बताया जाए कि सूचना व प्रसारण मंत्रालय की बॉलीवुड से मिलीभगत प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का नाम खराब कर रही है।

देश में एक संदेश लगातार जा रहा है कि भारत सरकार बॉलीवुड के कलाकारों के प्रति अत्यधिक नरमी का रुख रखती है। अभी तो ऐसी बीसियों फ़िल्में फ्लोर पर हैं, जो किसी न किसी ढंग से देश के संविधान, हिन्दू धर्म, पौराणिक नायकों पर प्रहार करने जा रही हैं। केंद्रीय मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने एक समिति बनाने का दावा किया था।

ये समिति ओटीटी प्लेटफॉर्म पर बनने वाली फिल्मों पर चौकसी करेगी। ये अलग बात है कि इस समिति के अस्तित्व के बारे में देश कुछ नहीं जानता। यदि ऐसी समिति है भी तो वह कहाँ और कौनसी फिल्मों पर निगाह रख रही है। ऐसी फ़िल्में उनकी गिद्ध दृष्टि को चकमा देकर प्रदर्शित कैसे होती जा रही है।

क्या ये समिति भविष्य में बनने वाली फिल्मों की स्क्रिप्ट आदि जाँच रही है या रिलीज होने के बाद उन फिल्मों की रिपोर्ट दे रही है? इस अदृश्य समिति के बारे में हम कुछ नहीं जानते हैं। मोदी सरकार इस देश के इतिहास की सबसे शक्तिशाली सरकार है, इसमें किसी को संदेह नहीं होना चाहिए। और इस सशक्त सरकार का सूचना व प्रसारण मंत्रालय भारत के इतिहास में सबसे अधिक लचर प्रदर्शन करने वाला रहा है तो इसमें भी किसी को संदेह नहीं होना चाहिए।

 

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