सामुदायिक स्वास्थ्य गाडरवारा अस्पताल में मचा हाहाकार, मरीजों को देखने वाला कोई डॉक्टर नहीं

0
2370
Spread the love

TOC NEWS @ www.tocnews.org

ब्यूरो चीफ गाडरवाराजिला नरसिंहपुर // दीपक अग्रवाल : 9039513465 

गाडरवारा. सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में सुविधाएं एवं इमरजेंसी घटनाओं के साथ मरीजों को नहीं देखने वाला कोई डॉक्टर नरसिंहपुर जिले की सबसे बड़ी हॉस्पिटल कहीं जाने वाली गाडरवारा हॉस्पिटल में आज रिछावर ग्राम की एक छोटी सी बच्ची का एक्सीडेंट में घटना ग्रस्त होने से अपनी जिंदगी और मौत के बीच लड़ रही है.

और जब उसको सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र गाडरवारा ले जाया गया तो वहां पर उस बच्ची की देखरेख करने के लिए या जांच करने के लिए ना तो कोई डॉक्टर उपलब्ध था ना ही कोई स्टाफ था छोटा-मोटा स्टाफ होने के कारण उसे जनरल बाड मैं भर्ती करया  गया जो एक नन्ही सी बच्ची अपनी जिंदगी मौत से लड़ रही थी उसको भर्ती कर दिया गया आज वह अपनी जिंदगी मौज के बीच लग रही है.

लेकिन गाडरवारा सरकारी अस्पताल में डाक्टरों द्वारा सूचना दी गई तो सूचना में पता चला कि सरकारी डॉक्टर साहब गाडरवारा के किसी निजी व्यक्ति के यहां प्राइवेट उपचार करने को गए हैं वह प्राइवेट उपचार उनके लिए जरूरी था लेकिन एक नन्ही सी बच्ची जो जिंदगी और मौत के बीच लड़ रही है उसको देखना उन्होंने जरूरी नहीं समझा एक और सरकार द्वारा स्वास्थ्य सुविधाओं की भरमार की जा रही है.

वहीं मोदी द्वारा आयुष्मान कार्ड की बड़ी-बड़ी बातें की जा रही है लेकिन जमीनी  स्तर पर कुछ और ही बयां हो रहा है शासन की योजनाओं को शासन के नुमाइंदों द्वारा चूना लगाया जा रहा है इमरजेंसी वार्ड में कोई सुविधाएं नहीं होती है ना ही इमरजेंसी मरीजों के लिए कोई डॉक्टर उपलब्ध रहता है और ना ही मरीज के लिए कोई सुविधाएं दी जाती हैं इमरजेंसी वार्ड में जो भी मरीज आते हैं उनको एक बटन लगा कर संतुष्ट किया जाता है चाहे उनको उनकी जिंदगी के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है

शासन प्रशासन इस ओर कोई कार्रवाई नहीं करता दिखाई दे रहा है जिससे आज यह खिलवाड़ मरीजों के एवं इमरजेंसी वार्ड में किया जा रहा है शासन प्रशासन से मांग है कि स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ खिलवाड़ ना किया जाए और इमरजेंसी सुविधाओं में शक्ति से कार्रवाई की जाए जिससे लोगों को स्वास्थ्य सुविधाएं मिल सकें एवं लोग अपनी जिंदगी ना गवा सकें सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र एवं सरकारी अस्पताल में जो डॉक्टर नियुक्त है.

उनको नियम अनुसार सबसे पहले इमरजेंसी सुविधाएं एवं तत्कालीन जो मरी जाता है उनकी देखरेख करना चाहिए ना कि प्राइवेट दुकान चलाने में लगे हुए हैं एवं निजी उपचार करने का धंधा जोरों से उनका चल रहा है शासन प्रशासन से मांग है कि जो डॉक्टर सरकारी अस्पताल में नियुक्त किया गया है वह सरकारी हॉस्पिटल में ही सुविधाएं दे सके ना कि अपना प्राइवेट क्लीनिक खोलकर बैठ कर अपना धंधा चलाएं और ना ही नगर में किसी निजी व्यक्ति के साथ उपचार किया जाए जिससे लोगों को आने वाली समस्याओं का निराकरण मिल सकेगा अटैचमेंट क्षेत्र

कोई जवाब दें