समाज हित से जुडी मांगो को लेकर आदिवासी समाज ने निकाली आक्रोश रैली झमसिंह के हत्यारों को फाँसी की मांग को लेकर सर्व आदिवासी समाज के द्वारा दिया गया बालाघाट जिला कलेक्टर को ज्ञापन

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ब्यूरो चीफ बालाघाट // वीरेंद्र श्रीवास : 83196 08778

बालाघाट। आदिवासी समाज के विभिन्न संगठनो से जुडे पदाधिकारियों ने संयुक्त रूप से 15 अक्टूबर को आदिवासी समाज द्वारा समाज हित से जुडी मांगो को जनआंदोलन किया है। जहां जनआंदोलन उत्कृष्ठ मैदान से प्रारंभ होकर कलेक्ट्रेड कार्यालय में समाप्त हुआ।

इस सदंर्भ में आदिवासी विकास परिषद् जिलाध्यक्ष भुवनसिंह कोर्राम ने जानकारी देते हुए बताया कि विगत 15 सितम्बर को सामाजिक संगठनो के माध्यम से 9 सुत्रीय मांगो के संदर्भ में प्रदेश सरकार के नाम प्रशासन को एक ज्ञापन सौंपा गया था। जहां उक्त मांगो को पूर्ण करने हेतू एक माह का अल्टीमेंटम भी दिया गया था
आंदोलन की चेतावनी दी गई थी। लेकिन लगभग समय पूरा होने जा रहा है अभी तक हमें शासन प्रशासन की ओर से कोई सुचना या अभिव्यक्ति प्राप्त नही हुई है। जिससे देखकर प्रतित हो रहा है कि हमारी मांगो पर कोई सुनवाई नही हुई है।

अब समाज हित से जुडी मांगो को लेकर आगामी 15 अक्टूबर को जनआंदोलन होगा। जहां म.प्र के कई जिलो से प्रतिमंडल के जुडे लोग शामिल होगें। वही गुजरात,महाराष्ट्र,छ.ग, तेंलगाना सहित कुल 7 राज्यो से भी आदिवासी दल शामिल होगा। जहां आदिवासी समाज के बेनर तले सडक पर उतरकर लोकतांत्रित तरिक से आंदोलन होगा। इस आंदोलन में राजनैतिक पार्टी व संगठनो को शामिल नही किया गया है, जिनका आंदोलन से कोई सरोकार भी नही होगा। यदि वे सामाजिक प्रतिनिधि या समाजसेवी बनकर आयेगें तो समाज की सहमती रहेगी।

श्री कोर्राम ने बताया कि पहले आदिवासी समाज के अनेक संगठन थे, जिनके अपने रास्ते भी अलग अलग थे, लेकिन अब समाज के हित में तमाम संगठनो ने एकजुट होकर अपना रास्ता भी एक बना लिया है। जहां सावंैधानिक अधिकारो के लिये आदिवासी समाज अकेले लडाई करेगा। प्राय: देखा जा रहा है कि वन विभाग की कु्ररता भी आदिवासी लोगो पर बढती जा रही है। वन विभाग, वनक्षेत्रो के निकट बसे गांवो के लोगो पर वन अधिनियम 2006, 2012 के तहत कार्यवाही करके ग्रामीणो का शोषण कर रहा है। भू-आंचार सहिंता के तहत प्रोजेक्ट के नाम पर विस्थापन कार्यवाही की जा रही है, आदिवासीयों को खदेडा जा रहा है, जिससे गांव समाप्त हो रहे है। इससे आदिवासी ग्रामीण भी प्रभावित हो रहे है।

एक्ट्रोसिटी एक्ट का पुलिस कोई पालन नही कर रही है। आदिवासीयों विद्यार्थीयों को अनेको योजनाओं के लाभ से वंचित होना पड रहा है। जहां शासकीय कर्मचारी भी प्रताडित करते है। इन्ही प्रताडनाओं को लेकर आदिवासी समाज की एक कमेंटी बनाई गई है जहां कमेटी के नेतृत्व में आदोलन किया जायेगा। जहां एक ब्लाक से लगभग 5 हजार लोग आंदोलन में शामिल होकर आंदोलन को रूप देंगें। समाज को 73 वर्ष बाद भी विश्वास पर टिकाये रखा गया है, लेकिन शासन प्रशासन के उदासीन रवैंये के कारण यह आंदोलन आयोजित किया जा रहा है।

एक ओर राजनीतिक एक्टिीवीटी में कोरोना का कोई पालन नही हो रहा है, इसलिये आदिवासी समाज के लोग भी एक आंदोलनकारी के रूप में नजर आयेगें।वही विधायक संजय उइके ने बताया कि हम लोगो की मांग को लगातार अनसुनी की गई। अभी निवेदन किया गया है अब उग्र आंदोलन होगा।

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