शहर में हर तरफ जहरीला रसायन, प्रदुषण विभाग का उच्चस्तरीय दिल्ली जांच दल नागदा पहुॅंचा, प्रदुषण देख टीम के होश उड़े

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ब्यूरो चीफ नागदा, जिला उज्जैन // विष्णु शर्मा 8305895567

उज्जैन/नागदा । नागदा के उद्योगों का प्रदुषण का मामला लोकसभा में उठने के बाद सोमवार को प्रदुषण विभाग का उच्चस्तरीय जांच दल नागदा पहुॅंचा। जांच दल में प्रदुषण विभाग की दिल्ली टीम के अधिकारियों के अलावा भोपाल व उज्जैन के विभाग के अधिकारी भी शामिल थे। पहले दिन जांच दल ने औद्योगिक इकाईयों का निरीक्षण किया। मंगलवार को उनके नदी क्षेत्र व अन्य स्थानों पर पहुॅंचे जाने की जानकारी मिली है। जांचदल इस दौरान विभिन्न स्थानों से नदी, जल, मिट्टी आदि के नमुने भी प्राप्त करेगा। 

जांच समिति द्वारा पुनः की जायेगी प्रदूषण की जांच

मध्यप्रदेश शासन के समक्ष नागदा शहर में गंभीर जल, वायु एवं भूमि प्रदूषण तथा गंभीर अनियमितता की जांच हेतु विभिन्न विभागो के अधिकारियों से गठित जांच समिति द्वारा जांच की जा रही थी। उक्त जांच मुझ शिकायतकर्ता को बिना बताये की जा रही थी जिस पर माननीय जिला कलेक्टर एवं दंडाधिकारी महोदय उज्जैन, अनुविभागीय दंडाधिकारी नागदा एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के अध्यक्ष को मेरे द्वारा आपत्ति दर्ज करवाई गई थी जिस पर संज्ञान लेने के पश्चात् नागदा तहसीलदार द्वारा मुझे दोपहर में जांच समिति के समक्ष अपना पक्ष रखने हेतु बुलाया गया था और मेरा पक्ष रखने के पश्चात् जांच समिति द्वारा मेरे बताए गए बिंदुओं से पानी और मिट्टी के सैंपल लेने सहित अन्य बिंदुओं पर कार्यवाही हेतु निर्देश समिति को दिए गए है और जांच दल द्वारा कल से पुनः नए सिरे से मेरी शिकायत के आधार पर जांच की जायेगी। नागदा तहसीलदार अंजू जैन द्वारा इस बात की पुष्टि की गई है कि 9 सदस्यों की यह जांच समिति मेरी शिकायत पर ही आई है और मेरी शिकायत के 10 बिंदुओं पर उक्त समिति द्वारा प्रतिवेदन शासन को प्रस्तुत किया जाएगा।

दुसरी तरफ प्रदुषण को लेकर नागदा में जांचदल के आने तथा उनके यहाॅं पहुॅंचने की पूर्व सूचना उद्योगों को होने की जानकारी लोगों के मुॅंह से सुनने को मिली है। बताया जा रहा है कि उच्च स्तरीय दल के इस निरीक्षण को लेकर उद्योगों ने भी दो दिन पहले से ही अपनी व्यवस्थाऐं जमाना शुरू कर दी थी।

प्रमुख उद्योगों में जहाॅं उत्पादन प्रक्रिया को घटाया गया है वहीं प्रदुषण फैलाने से जुडे आरोपों में घीरे केमिकल उद्योगों ने भी अपने प्रतिष्ठानों के भीतर उन सभी कमीयों को ढकने की कोशिश की जो जांचदल की पकड में आने पर उद्योगों की परेशानी का कारण बन सकती थी। जांच दल ने उद्योगों के भीतर क्या और किस तरह का निरीक्षण पहले दिन किया इस बात की जानकारी तो नहीं मिल सकी है ना ही इस टीम में शामिल किसी भी छोटे स्तर के अधिकारी ने अपना मुॅंह खोला है। सर्कीट हाउस पर शाम को जिले के प्रदुषण अधिकारी श्री द्विवेदी सेे पत्रकारों ने निरीक्षण संबंधी कार्रवाई को लेकर बातें जाननी चाही लेकिन वह गोलमोल जवाब देते हुए दिखाई दिए।

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शहर में हर तरफ गडा हुआ है जहरीला रसायन

सर्कीट हाउस पर ही वर्धमान क्षेत्र स्थित एक मकान के भीतर हजारडस्ट तथा अन्य केमिकल गाडे जाने की शिकायत लेकर एक व्यक्ति प्रदुषण अधिकारी श्री द्विवेदी के सामने जा पहुॅंचा। उसने मामले की शिकायत स्थानिय कार्यालय तथा एसडीएम को किए जाने की जानकारी श्री द्विवेदी को की तथा इस संबंध में हुई कार्रवाई का ब्यौरा मांगा तो श्री द्विवेदी इस पर कोई जवाब नहीं दे पाए। शिकायतकर्ता ने अपनी शिकायत में इस बात का उल्लेख किया है लैंक्सेस उद्योग द्वारा वर्धमान काॅलोनी स्थित गुलमोहर सदन जो उनके आधिपत्य व स्वामित्व की जगह है के भीतर गड्डे खोदकर हजारडस्ट वेस्ट अन्य घातक केमिकल कई दिनों तक रात्रि में यहाॅं लाकर दफनाऐ हैं।

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उद्योग के कर्मचारियों ने जिन गड्डों में केमिकल दबाया है उन पर मिट्टी आदि डालकर पुनः भूमि को व्यवस्थित करते हुए बगदीचे का निर्माण कर दिया गया है। शिकायतकर्ता ने शिकायत के साथ गड्डे खोदकर रसायन गाडे जाने से जुडे चित्र भी अधिकारियों को उपलब्ध करवाऐं है। रसायन गाडे जाने से क्षेत्र का भूमिगत जल पुरी तरह से प्रदुषित हो चुका है साथ ही उक्त रसायन अब रिसकर चंबल नदी में भी जाने लगा है जिससे पेयजल स्त्रोत भी प्रदुषित हो गया है।

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कार्बन उगलने वाले उद्योग पर कार्रवाई कब

एक और पुरा विश्व कार्बन उत्सर्जन को लेकर चिंतित है वहीं दूसरी और नगर में कार्बनिक पदार्थो का उपयोग कर विभिन्न रसायन बनाने वाला एक उद्योग क्लीयरेंट यहाॅं दबे-छीपे तरीके से हजारों टन कार्बनिक पदार्थो से फायबर को रंगने के उपयोग में आने वाली श्याही का निर्माण कर रहा है। बताया जाता है कि उद्योग में उत्पादन प्रक्रिया में अत्यधिक कार्बन का उपयोग होता है जिसके चलते क्षेत्र का वातावरण गंभीर रूप से प्रदुषित हो चुका है

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तथा यहाॅं के हवा में कार्बन के अंश निर्धारित मापदण्ड से कई गुना अधिक पहुॅंच गए हैं। प्रदुषण विभाग द्वारा जो माॅनीटर कार्बन मापने हेतु लगाए गए है उन्हें भी उद्योग के इशारों पर एक निर्धारित मात्रा पर सेट कर दिया गया है जिससे वास्तविक रिर्पोट भी शासन को नहीं पहुॅंच पा रही है। क्षेत्र के नागरिकों के स्वास्थ्य पर क्लीयरेंट उद्योग के चलते गंभीर बिमारियाॅं हो रही है। जिसकी जांच भी आए जांचदल को करना चाहिए।

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