यौन शोषण में CJI गोगोई को प्रशांत भूषण समेत 7 लोगों ने मिलकर फंसाया, सुप्रीम कोर्ट में वकील का सनसनीखेज खुलासा

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नई दिल्‍ली: प्रधान न्‍यायाधीश (CJI) रंजन गोगोई पर कथित यौन शोषण के आरोपों के मामले में वकील मनोहर लाल शर्मा ने सनसनीखेज दावा किया है. सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को शर्मा ने दावा किया कि मामले में पूर्व महिला कोर्ट कर्मचारी द्वारा शिकायत दायर करने के पीछे और कोई नहीं बल्कि वकील प्रशांत भूषण है. शर्मा का दावा है कि प्रशांत भूषण ने खुद ये बात स्वीकार की है कि उन्होंने आरोप लगाने वाली महिला को शिकायत दायर करने में मदद की.

शर्मा ने कहा कि उन्‍होंने इस संबंध में सुप्रीम कोर्ट में याचिका लगाई है. इसी याचिका में सात लोगों- प्रशांत भूषण, शान्ति भूषण, इंदिरा जयसिंह, दुष्यंत दवे, वृंदा ग्रोवर, नीना गुप्ता और कामिनी जयसवाल के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने के आदेश दिए जाने की मांग की गई है. शर्मा ने कहा कि ‘द वायर को दिए इंटरव्यू में खुद भूषण ने माना है कि इंदिरा जयसिंह का यह कहना कि उनका आरोप लगाने वाली महिला से सरोकार नहीं है, यह गलत है.

जब शर्मा ने CJI गोगोई के सामने जिक्र किया कि भूषण ने मामले में अपनी संलिप्तता ‘स्वीकार’ की है, तो उन्‍होंने कहा, “किसी अन्य खंडपीठ के समक्ष उल्लेख करें, इस खंडपीठ के समक्ष नहीं.” फिर जस्टिस अरुण मिश्रा की अगुवाई वाली बेंच के सामने मामला गया तो उन्‍होंने भी सुनवाई से इनकार कर दिया.

शिकायतकर्ता सुप्रीम कोर्ट की पूर्व जूनियर कोर्ट असिस्टेंट है. उन्होंने CJI के खिलाफ यौन उत्पीड़न के आरोप लगाते हुए शीर्ष अदालत के सभी न्यायाधीशों को एक शपथ-पत्र भेजा था. शिकायतकर्ता ने आरोप लगाया था कि जस्टिस एन.वी. रमना प्रधान न्यायाधीश के करीबी दोस्त हैं और इसी वजह से मामले की निष्पक्ष सुनवाई नहीं हो सकती. इसके बाद जस्टिस रमना ने खुद को मामले की जांच करने वाली समिति से अलग कर लिया था.

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