मुलताई में ड्रोन से की जा रही फसल गिरदावरी, खेतों में कीचड़ होने से पटवारी नहीं पहुंच पा रहे खेतों तक तो ड्रोन का लिया सहारा

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TOC NEWS @ www.tocnews.org

ब्यूरो चीफ मुलताई, जिला बैतूल 

मुलताई। किस खेत में कितनी फसल लगी है, कौन सी फसल लगी है, कितने रकबे में लगी है, यह पूरी जानकारी पहले खेतो-खेत जाकर पटवारियों द्वारा खसरे के आधार पर की जाती थी, लेकिन वर्तमान समय में ज्यादा बारिश होने से खेतों में कीचड़ है, वहीं किसानों को यह भी शिकायत होती थी कि पटवारी सभी खेतों तक नहीं पहुंचे।

इन सभी समस्याओं को देखते हुए मुलताई में पटवारियों द्वारा ड्रोन से फसल गिरदावरी की जा रही है। लगभग एक दर्जन से ज्यादा पटवारियों द्वारा फसल गिरदावरी के लिए ड्रोन का सहारा लिया जा रहा है। ड्रोन से गिरदावरी करने का यह फायदा हो रहा है कि कम समय में खेतों में लगी फसल का सही आंकलन हो पा रहा है, वहीं पटवारी की पहुंच हर खेत तक हो गई है। खेतों में फसल के सही आंकलन होने से किसान भी खुश है।

तकनीक का यदि सही इस्तेमाल किया जाए तो वह बहुत फायदेमंद साबित होती है। मुलताई में पटवारियों द्वारा ड्रोन का सही इस्तेमाल तक महीनों के काम को सप्ताह भर में पूरा करने का काम किया जा रहा है। मुलताई के पटवारियों ने फसल गिरदावरी के लिए ड्रोन का सहारा लिया है। बारिश के इस मौसम में भी पटवारियों की पहुंच हर खेत तक हो गई है। मुलताई पटवारी सोहबत धुर्वे ने बताया कि फसल गिरदावरी की आवश्कता फसल के पंजीयन के समय, क्राप कटिंग के समय, आपदा में फसल नुकसानी के समय एवं फसल बीमा प्राप्त करने के लिए लगती है।

अभी गिरदावरी का सही समय है, लेकिन अभी बारिश होने से हर खेत में पहुंचना संभव नहीं है, क्योंकि खेतों में कीचड़ ही कीचड़ फैला हुआ है। ऐसे में ड्रोन के माध्यम से फसल गिरदावरी की जा रही है। पटवारी सोहबत धुर्वे ने बताया कि ड्रोन से फसल गिरदावरी करने के बहुत फायदे हैं, जिससे प्रत्येक खेत में फसल की एकदम सही स्थिति का पता लगता है। फसल कितने रकबे में बोई गई है, कौन सी फसल लगाई गई है, यह भी पता चल जाता है। जिससे गलती एवं गड़बड़ी की कोई आशंका भी नहीं रहती है। पहले खसरे के माध्यम से खेतों में जाकर गिरदावरी करना पड़ता था, जिसमें समय भी ज्यादा लगता था, लेकिन ड्रोन के माध्यम से समय बहुत कम लगता है और काम भी एकदम सही-सही होता है। पटवारियों द्वारा ड्रोन भी चलाया जा रहा है।

क्या होती है गिरदावरी

किसान ने अपने खेत के कितने रकबे में कौन सी फसल की बुवाई की है, यह जानकारी पटवारी द्वारा शासन के दस्तावेज में दर्ज करवाई जाती है, इसे ही गिरदावरी कहा जाता हैै। यह काम हाथ से कागजों पर किया जाता है। इसके लिए सरकार द्वारा एक एप भी बनाकर लांच किया गया है। जिससे कोई भी किसान एप के माध्यम से फसल गिरदावरी की जानकारी प्राप्त कर सकता है। पहले कई बार आरोप लग चुके हैं कि पटवारियों द्वारा घर बैठकर मनमाने ढंग से गिरदावरी की जानकारी बनाई जाती है, लेकिन अब ड्रोन के माध्यम से गिरदावरी होने से यह शिकायत पूरी तरह से दूर हो जाएगी।

अच्छी बारिश होने से बेहतर है फसल की स्थिति

क्षेत्र में लगातार बारिश हो रही है, अच्छी बारिश होने से नदी-नाले उफान पर है और बांध लबालब भरे हुए हैं। इधर फसल की स्थिति भी बहुत अच्छी बताई जा रही है। किसानों का कहना है कि अभी तक हुई बारिश से फसल बहुत अच्छी है, लेकिन अब बारिश रूकनी चाहिए, मुलताई क्षेत्र में पिछले एक पखवाड़े से लगातार बारिश हो रही है। कभी रिमझिम तो कभी तेज बारिश से जन-जीवन भी अस्त-व्यस्त है, लेकिन किसानों के लिए यह बारिश अमृत साबित हुई है। किसानों का कहना है कि सोयाबीन की फसल को जितनी बारिश की आवश्कता थी, वह बारिश हो चुकी है।

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