मुख्यमंत्री की वादा खिलाफी से नाराज़ अध्यापिकाएँ करवाएगी अपना केश मुडंन

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नीमच – बीते 20 सालों से प्रदेश के सरकारी स्कूलों में सेवा दे रहे अध्यापक संवर्ग के  अध्यापक शिक्षा विभाग की माँग को लेकर एक बार फिर लाम बन्द हो रहे हैं। एक जहाँ केन्द्र सरकार गैर जरूरी कानून और विभागों को कम करके काम को तेज और हल्का बनाने की कोशिश में हैं वहीं प्रदेश की शिवराज सरकार अध्यापक संवर्ग को शिक्षा विभाग के स्कूलों में कार्यरत अध्यापको को शिक्षा विभाग मे शामिल करने के मुद्दे को लटकाये हुवे है !

जबकि ग्रामीण और शहरी अलग अलग विभागों में इन अध्यापकों की नियुक्तियां हैं। इस तरह शिक्षा विभाग के नियमों से काम करने वाले अध्यापकों की माँग है कि उनके लिए गैर जरुरी शहरी और ग्रामीण विभागों को अलग कर शिक्षा विभाग में संविलियन कर दिया जावे। ज्ञात हो कि अटल सरकार द्वारा वेतन भत्तो में कटौती और पेंशन समाप्ति का जो प्रावधान लाया गया था वो प्रावधान इन अल्पवेतन भोगी अध्यापकों पर भारी पड़ रहा है। और ऊपर से पहले की अपेक्षा नये नये आदेश निकालकर हमारी वेतन भी कम कर दी  है !

जबकी अध्यापको को अनुकंपा नियुक्ति  का भी कोई प्रावधान नहीं हैं। किसी अध्यापक की मौत पर पूरा परिवार सड़क पर आ जाता है ,और मजदूरी करन हेतू बाध्य हो जाता है । सरकार द्वारा अध्यापकों से दोयम दर्ज़ का व्यवहार किया जाता है। हमारे लिए निकलने वाले हर आदेश में विसंगति होती है। जब उच्चाधिकारियों से इन विसंगति पर बात की जाती है तो वे बजट प्रावधानों की बात बोल कर पल्ला झाड़ लेते हैं। यदि मूलभूत नियमो के आधार पर सरकार ईमानदारी से इन मसलों को हल करना चाहे तो दो दिन में सब ठीक हो सकता है। किन्तु सरकार की नीयत में ही खोट है।

सरकार के इसी ढुलमुल और गैर जिम्मेदाराना रवैये से नाराज़ होकर आज़ाद अध्यापक संघ ने सभी अध्यापकों के साथ मिलकर अध्यापक अधिकार यात्रा आरम्भ की है। जो कि शिक्षा विभाग में संविलियन के मूल उद्देश्य और शिक्षा गुणवत्ता सुधार की भावना से 13 जनवरी को भोपाल पहुँचेगी। आज़ाद अध्यापक संघ की प्रान्त अध्यक्ष श्रीमती शिल्पी शिवान द्वारा सरकार के इस टालमटोली भरे रवैये से दुखी होकर खुद का मुंडन कर सरकार का तर्पण करने का निर्णय लिया है।

मध्यप्रदेश में लगभग  3 लाख अध्यापक स्कूलों में पदस्थ हैं जो विभिन्न मांगो को लेकर आये दिन आंदोलन और हड़ताल की राह पर दिखाई देते हैं। उधर सरकार इनकी माँगो के समुचित समाधान की बजाय शॉर्टकट अपनाती है और कभी इनके किसी नेता को विधायक की टिकिट देकर तो कभी विभिन्न विभागों में प्रतिनियुक्ति देकर मामले को शांत करना चाहती है। परन्तु अब अध्यापक संवर्ग सरकार की इन चालों को भली भाँती समझ चुका है अतः वह 12 जनवरी तक माँगे न माने जाने पर 13 जनवरी को सरकार की खिलाफत करने तैयार है।

ईस तारतम्य मे नीमच जिले  से  विनोद राठोर(प्रंतीय संगठन मंत्री म.प्र.) , मनीष पुरोहित (जिला संयोजक नीमच ),चांदमल पाटीदार (जिलाध्यक्ष) श्रीमति रचना (महिला जिलाध्यक्ष ), पवन जेन (संयोजक जिला नीमच), दिपक टेलर (जिला संरक्षक), पंकज गुर्जर (संरक्षक जिला नीमच) समरथगिर गोस्वामी (ब्लाक अध्यक्ष मनासा), शौकिन किर (ब्लाक अध्यक्ष जावद) श्रीमति शिक्षा शर्मा (ब्लाक अध्यक्ष नीमच ) ने सभी अध्यापकों और पालको से इस अधिकार यात्रा  13 जनवरी को भोपाल पहुँचकर अध्यापिका बहन शिल्पी सिवान को समर्थन देने हेतू  पूर्ण सहयोग की अपील की है।

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