मध्यप्रदेश की जेलों एवं न्यायालयों के मध्य वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग प्रणाली का प्रारंभ

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जबलपुर! मान्नीय उच्च न्यायालय मध्यप्रदेश जबलपुर के निर्देश पर प्रदेश की जेलों एवं न्यायालयों के मध्य वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से जेल में परिरूद्ध बंदियों को प्रस्तुत करने एवं प्रकरणों के सुनवाई पूर्ण करने के निर्देश दिये गये।
मान्नीय मुख्य न्यायाधिपति म.प्र. उच्च न्यायालय श्री एस.के. सेठ के निर्देश के पालन में म.प्र. शासन द्वारा प्रदेश की जेलों में 200 ई-कोर्ट (केबिन) का निर्माण बंदी के श्रम द्वारा अति-अल्प समय में कराया गया। न्यायालयों एवं जेलों के मध्य सुनवाई हेतु आवश्यक उपकरण जैसे मॉनीटर, केमरे, सी.पी.यू., फर्नीचर आदि की व्यवस्था मान्नीय उच्च न्यायलय की निविदादर पर की गई।
विचाराधीन बंदियों के प्रकरणों के शीघ्र निराकरण की इस महत्वाकांक्षी योजना में सुनवाई में विघ्न न आये अतः स्वान/बी.एस.एन.एल. से नेट कनेक्टिविटी के साथ-साथ दोनों छोरों पर तकनीकी सहायकों की नियुक्तियॉं भी की गई है। प्रदेश की जेलों में अब तक 370 ई-कोर्ट एवं 600 न्यायालयों में ई-कोर्ट तैयार हो चुके है।
इस एतिहासिक एवं महत्वाकांक्षी परियोजना का लोकार्पण मान्नीय श्री एस.के. सेठ मुख्य न्यायाधिपति के कर-कमलों से नेताजी सुभाष चन्द्र बोस की 123वीं जयंती के उपलक्ष्य में केन्द्रीय जेल जबलपुर से 23 जनवरी, 2019 को शाम पॉंच बजे सम्पन्न होगा। इस सुअवसर पर मान्नीय न्यायाधिपति श्री आर.एस.झा सर भी उपस्थित रहेंगें।
परियोजना के लोकार्पण के अवसर पर रजिस्ट्रार जनरल श्री अरविंद कुमार शुक्ला एवं डॉ. जी.आर.मीणा अतिरिक्त महानिदेशक जेल एवं सुधारात्मक सेवाएॅं भी उपस्थित रहेंगें।
इस एतिहासिक परियोजना को मूर्त रूप देने में श्री एफ.एच. काजी, रजिस्ट्रार आई.टी. एवं श्री गोपाल ताम्रकार जेल उप महानिरीक्षक की महत्ती भूमिका रहीं।

वीडियों कॉन्फ्रेंसिंग परियोजना प्रारंभ होने के लाभ-

1. शीघ्र एवं सस्ता न्याय प्राप्त हो सकेगा।
2. बड़ी संख्या में पेशियों में लगे पुलिस बल की बचत होगी।
3. पेशियों से फरारी की घटनाओं पर रोक लगेगी।
4. जेलों की भीड़ कम होगी।
5. आदतन अपराधियों की गतिविधियों पर रोक लगेगी।

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