भारत सरकार के दूसरे राहत पैकेज से नहीं मिलेगी खास राहत

0
356
Spread the love

TOC NEWS @ www.tocnews.org

विशेष संवाददाता

मूडीज इन्वेस्टर्स सर्विस ने कहा है कि सरकार के दूसरे राउंड के प्रोत्साहन पैकेज से निकट भविष्य में उपभोक्ता खर्च तो बढ़ेगा, लेकिन इससे आर्थिक वृद्धि में सीमित मदद मिलेगी. रेटिंग एजेंसी ने गुरुवार को कहा, “ यह प्रोत्साहन 46,700 करोड़ रुपये या वित्त वर्ष 2020-21 के वास्तविक जीडीपी के अनुमान का 0.2 फीसदी है. इसमें जबरदस्त गिरावट के बीच अर्थव्यवस्था को समर्थन देने की सीमित क्षमता है.

कोरोना संकट की वजह से देश की अर्थव्यवस्था में करीब आठ महीने से नरमी है. वित्तीय प्रोत्साहन की लंबे समय से मांग के बीच सरकार ने 12 अक्टूबर को कर्मचारियों और राज्यों के लिये सीधे वित्तीय समर्थन और मांग बढ़ाने के उपायों की घोषणा की थी.

इसमें सरकारी कर्मचारियों को अवकाश यात्रा रियायत (एलटीसी) के एवज में नकद वाउचर योजना और त्योहारों के लिए विशेष अग्रिम (फेस्टिवल एडवांस) जैसे उपाय शामिल हैं.

मूडीज ने कहा कि यह प्रोत्साहन 46,700 करोड़ रुपये या चालू वित्त वर्ष के वास्तविक सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) अनुमान का 0.2 फीसदी है. मौजूदा आर्थिक स्थिति को देखते हुए इस पैकेज में इकनॉमी को समर्थन देने की सीमित क्षमता है. नए प्रोत्साहन उपायों का मकसद त्योहारी मौसम में उपभोक्ता खर्च और पूंजीगत व्यय बढ़ाना है.

वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण के इस पैकेज में केंद्र ने राज्यों को 12,000 करोड़ रुपये का ब्याजमुक्त कर्ज देने और 25,000 करोड़ रुपये का अतिरिक्त पूंजीगत खर्च करने की घोषणा की है.

रेटिंग एजेंसी मूडीज ने कहा कि इसमें अगर इस साल सरकार के बाकी प्रोत्साहन को भी जोड़ दें तो भी ये उपाय बहुत कम हैं. दो दौर के प्रोत्साहन के जरिये सरकार कोरोना वायरस से प्रभावित अर्थव्यवस्था में सीधे सिर्फ जीडीपी का 1.2 फीसदी खर्च कर रही है. मूडीज ने कहा कि सरकार के इस राहत पैकेज का राजकोष पर कोई असर नहीं पड़ेगा. छोटे स्तर के इस तरह की राहत से गंभीर संकट से जूझ रही अर्थव्यवस्था को बहुत मदद मिलने की उम्मीद नहीं है. भारत की खराब राजकोषीय स्थिति को देखते हुए सरकार के हाथ में राहत पैकेज के नाम पर बहुत बड़ी रकम घोषित करना संभव नहीं है.

कोई जवाब दें