बिड़ला के ग्रेसिम उद्योग व बहुराष्ट्रीय लैंक्सेस उद्योग के प्रदूषण नियंत्रण दावों की विधानसभा में खुली पोल

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TOC NEWS @ www.tocnews.org

ब्यूरो चीफ नागदा, जिला उज्जैन // विष्णु शर्मा 8305895567

नागदा । वरिस्ठ पत्रकार कैलास सनोलिया के द्वारा प्राप्त जानकारी के आधार पर औद्योगिक नगर नागदा में बिड़ला घराना के ग्रेसिम उद्योग व बहुराष्टीय लैक्सेस के प्रदूषण नियंत्रण के दावों की पोल गुरुवार को विधानसभा में खुल गई। इन उद्योगों के खिलाफ प्रदूषण पर नियंत्रण नहीं करने पर अदालत में दायर विभिन्न प्रकरणों का खुलासा किया गया।

महिदपुर के विधायक बहादुरसिंह चौहान के परिवर्तित तारांकित प्रश्नों के जवाब में लोक निर्माण मंत्री सज्जन सिंह वर्मा ने खुलासा किया। 1 मार्च 2018 से 10 जून 2019 तक की ग्रेसिम से संबधित जांच रिपोर्ट नकारात्मक साबित हुई। इस अवधि की जांच रिर्पोटों में डिजाल्ड सालिड्स एवं टीडीएस अधिक पाए गए हैं। मंत्री ने बड़ी बात करते हुवे यह भी खुलासा कीया कि ये तो पूर्व से ही अधिक पाए जा रहे है। इसी कारण से ग्रेसिम उद्योग के खिलाफ  पूर्व से ही प्रकरण दायर किए गए है। यहां तक मंत्री ने उद्योगों के खिलाफ  प्रदूषण से संबधित सारे प्रकरणों की पोल खोल दी।

मंत्री वर्मा ने बताया की उद्योग के विरूद्ध जल अधिनियम 1974 की धारा 44 के तहत मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी उज्जैन के न्यायालय में प्रकरण क्रमांक 4903/ 2017 द्धारा न्यायालयीन कार्यवाही की गई है। जोकि वर्तमान में प्रकियाधीन है। नागदा के उद्योगों के विरोध में चल रहे प्रकरणों के बारे में मंत्री ने बताया जल अधिनियम 1974 के तहत प्रदत सम्मति शर्ताे का उल्लघनं करने पर ग्रेसिम के खिलाफ  प्रकरण क्रमांक 11088/2014 व प्रकरण क्रमांक 9700/2017  तथा वायु अधिनियम के तहत 1981 के तहत सम्मति शर्तो का उल्लघंन करने पर प्रकरण क्रमांक 8174 / 2015 मेसर्स लैक्सेस इंडिया लिमिटेड के विरूद्ध  सम्माति शर्ता का उल्लघंन करने पर जल अधिनियम 1974 के तहत प्रकरण क्रमांक  4077/ 2011 व प्रकरण क्रमांक 9699/ 2017 तथा मेसर्स ग्रेसिम इंडस्ट्रीज केमिकल डिवीजन के खिलाफ जल अधिनियम 1974 के तहत प्रकरण क्रमांक 9690/2017 दायर किए गए हैं।

*ग्रेसिम का प्लान 106 करोड़ का*

मंत्री वर्मा ने जवाब में यह भी बताया कि चंबल नदी में निस्त्राव को रोकने के लिए ग्रेसिम ने दूषित जल उपचार व्यवस्था उन्नयन का एक प्लान 106 करोड़ का  प्रस्तुत किया है। जिसके तहत माह जनवरी 2021 तक उपचारित जल का निस्त्राव बंद कर दिया जाएगा। इस कार्ययोजना के समयबद्ध क्रियान्वयन के लिए उद्योग ने 26.5 करोड़ की बैंक गारंटी बोर्ड में प्रस्तुत की है।

बाईट- आरपी वाध प्रदूषक विभाग अधिकारी

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