बिजली चोरी के बड़े रैकेट का पर्दाफाश. स्पेशल विजिलेंस टीम की छापेमारी

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बिजली निगम की c में बुधवार को तिगांव रोड पर बिजली चोरी के बड़े रैकेट का पर्दाफाश हुआ है। बिजली विभाग के कुछ अधिकारियों की मिलीभगत से पूरे सिंडिकेट को ऑपरेट किया जा रहा था। जिन उपभोक्ताओं के कनेक्शन बिजली चोरी के आरोप में स्थाई रूप से काट दिए गए थे, उनके घरों में चोरी छुपे मीटर लगा दिया गया और बगैर बिल जनरेट किए वसूली की जा रही थी। बिजली विभाग के एक कर्मचारी ने पूरे गड़बड़झाले पर जब आवाज उठाई तो उसे भी नौकरी से निकाल दिया गया। इसके बाद मामला बिजली निगम की स्पेशल विजिलेंस के पास पहुंची, जिसकी जांच में 21 उपभोक्ता रंगे हाथ पकड़े गए। अटाली निवासी देवेंद्र कुमार सिटी-2 सबडिविजन में ठेके पर एलडीसी के पद पर कार्यरत थे, लेकिन उन्हें बिजली निगम की ओर से निकाल दिया गया था।

उनका आरोप था कि उन्होंने जब अधिकारियों के सामने सबडिविजन में हो रही गड़बड़ी का मामला उठाया तो उन्हें ही नौकरी से निकाल दिया गया। देवेंद्र ने बताया कि ड्यूटी के दौरान उन्हें पता चला कि अधिकारियों की मिलीभगत से सबडिविजन में बिजली चोरी में डिसकनेक्टेड उपभोक्ताओं के घरों में मीटर लगाकर उन्हें बिजली दी जा रही है। ऐसे उपभोक्ताओं का बिजली बिल भी जनरेट नहीं होता है, इसकी वजह से बिजली विभाग के अधिकारी मंथली वसूली करते थे। इससे निगम को हर महीने लाखों रुपये का नुकसान पहुंचाया जा रहा था। जब उन्होंने यह मामला उठाया तो उन्हें ही नौकरी से निकाल दिया गया। इसके बाद उन्होंने ऐसे उपभोक्ताओं की पूरी लिस्ट बनाकर इसकी शिकायत निगम के चेयरमैन एसएस कपूर से की।

उन्होंने मामले की जांच के लिए रेवाड़ी और गुड़गांव से अधिकारियों की स्पेशल टीम बनाकर भेजी। जांच में टीम को ऐसे 21 मामले मिले जो निगम के रिकार्ड में पीडीसीओ (परमानेंटली डिसकनेक्टेड कंज्यूमर) थे, लेकिन वे सामान्य उपभोक्ता की तरह मीटर लगाकर बिजली जला रहे थे। कुछ जगह मीटर के खाली बाक्स लगे हुए थे। उपभोक्ता डायरेक्ट बिजली चोरी कर रहे थे। कनेक्शन कटने के बावजूद ऐसे उपभोक्ताओं के यहां फिर से मीटर लगा दिए गए। मीटर लगे होने की वजह से जांच के लिए पहुंचने वाली टीम को भी संदेह नहीं होता था और बेखौफ होकर बिजली चोरी के सिंडिकेट को चलाया जा रहा था। वर्जन यह गंभीर मामला है। इसकी कड़ाई से जांच की जा रही है कि लापरवाही कहां से हुई है। चोरी के आरोपी उपभोक्ताओं के यहां मीटर कैसे लगाए गए। उनका बिलिंग रेकॉर्ड क्यों नहीं था? जांच पूरी होने के बाद आगे की कार्रवाई की जाएगी।

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