पांच साल हो गये ‘‘प्रदेश टुडे’’ के लुटेरों ने पैंतालीस हजार रूपये वापस नहीं किये

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TOC NEWS @ क्राइम 

भोपाल. हरामखोरी की भी हद होती हे परंतु इन हरामखोरो ने तो हद  ही कर दी पत्रकार संगठन आइसना के 45 हजार की रकम खा गए, वाकया ऑल इण्डिया स्माल न्यूज पेपर्स ऐसोसिएशन ‘‘आइसना’’ पत्रकारों के समूह के पैंतालीस हजार रुपये लेकर विज्ञापन नहीं छापने का है, जो सीधे-सीधे विश्वासघात है।

वहीं विज्ञापन नहीं छापा गया तो ईमानदारी इस बात की होनी चाहिए कि रुपया वापस कर दिया जाए। परन्तु जब नियत में खोट हो तो ‘‘राम नाम जपना पराया माल अपना’’ लगता है। तो सीधे सीधे यही बताना चाहता हूं कि वेश्या भी रकम लेकर अपना वचन ईमानदारी से निभाती है, ये तो उनसे भी गये बीते निकले ‘‘प्रदेश टुडे’’ के हृदयेश दीक्षित और सतीश पिम्पले जिनने अपनी रुपयों की हवस के लिए पत्रकार संगठन को भी नहीं बख्शा ।

उस समय संगठन ने इन लुटेरों के खिलाफ शिकायत कर की थी परंतु अखबार की धौस के आगे पुलिस थाने ने कोई कार्यवाही नहीं की, आइसना के प्रदेश महासचिव ने बताया की शिकायत आज भी थाने में पेंडिंग है. परन्तु लुटेरोँ को यह जान लेना चाहिये कि विज्ञापनदताओं के साथ लूट ज्यादा दिन नहीं चलेगी बदहजमी हो गई तो, कहीं न कहीं औंकना भी पड़ेगा। इनकम टैक्स की छापेमार कार्रवाई पर दलिया ‘माफिया’ प्रदेश टुडे समूह हृदयेश दीक्षित ने पांच करोड़ की काली कमाई ओकी थी.

ज्ञात हो कि ‘‘प्रदेश टुडे’’ को 11 सितम्बर 2011 को भोपाल  में ‘‘आइसना सम्मान समारोह 2011’’ का विज्ञापन प्रकाशित करने को दिया था, जो प्रदेश टुडे ने प्रकाशित नही किया, जिसके लिये ‘‘प्रदेश टुडे’’ को पैंतालीस हजार रुपये नगद दिये गये, जो वापस मांगे गए तो उन्होंने देने से इनकार कर दिया। वहीं दबंगई दिखाते हुए सुपारी लेने और निपटाने की धमकियां दी, जिसके लेन-देन में नितिन दुबे, उपदेश अवस्थी, विभूति शामिल थे जो प्रबंधन का मोहरा बनें ।

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दलिया ‘माफिया’ और उनसे जुड़े सरकारी अफसरों पर इनकम टैक्स की रैड

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दलिया 'माफिया' और उनसे जुड़े सरकारी अफसरों पर इनकम टैक्स की रैड

भोपाल. महिला एवं बाल विकास विभाग में अरबों रुपए के पोषण आहार सप्लाई करने वालों पर आयकर विभाग की इन्वेस्टिगेशन विंग ने बड़ी कार्रवाई की है। इसमें पोषण आहार के निर्माताओं के साथ-साथ राज्य सरकार के उपक्रम एमपी एग्रो के दो जीएम के घर पर भी छापा मारा गया है।
-मंडीदीप में एमपी एग्रो न्यूट्री फूड कंपनी की दो फैक्ट्रियों में यह पोषण आहार बनाया जाता था।
-आयकर विभाग के सूत्रों का कहना है कि मंडीदीप की इस कंपनी में 30 फीसदी इक्विटी राज्य सरकार की है।
-शेष कंपनी संचालक सुनील जैन व उनका परिवार और हृदयेश दीक्षित व उनके भाई अवधेश दीक्षित की है।
-एमपी एग्रो के जीएम रवींद्र चतुर्वेदी व जीएम वेंकटेश धवल इसमें बतौर डायरेक्टर हैं।
-आयकर विभाग की टीम ने कंपनी से जुड़े लोगों पर भोपाल, इंदौर समेत मुंबई में 33 ठिकानों पर दबिश डाली। कार्रवाई देर रात तक जारी थी।
सालाना टर्न ओवर 100 करोड़ रुपए का
-प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि एमपी एग्रो न्यूट्री फूड का सालाना टर्न ओवर 100 करोड़ रुपए का है।
-कंपनी के संचालकों ने कारोबार का फैलाव शुरू किया था। इसी के तहत मुंबई में श्री कृष्णा देवकॉन नाम से कंपनी खोली गई, जिसने रियल स्टेट में काम प्रारंभ किया।
-दो-तीन प्रोजेक्ट मुंबई में चल रहे हैं। यह भी संकेत मिले हैं कि रियल स्टेट का कारोबार इंदौर में भी शुरू होना था।
-आयकर विभाग की टीम ने दस्तावेजों को जब्त कर लिया है। सुनील जैन समूह के यहां से 5 लॉकरों की जानकारी मिल चुकी है। 12 ब्रीफकेस कंपनियों का भी पता चला है।
कहां कितने छापे
भोपाल में 5, मुंबई में पांच और इंदौर में 23 ठिकाने। मुंबई में छापे के बाद एक ऑफिस की जानकारी मिलने के बाद सर्वे की कार्रवाई गई।
800 करोड़ का कॉन्ट्रैक्ट
महिला एवं बाल विकास विभाग हर साल करीब 800 करोड़ रुपए का कॉन्ट्रैक्ट एमपी एग्रो को देता है। एमपी एग्रो पोषण आहार बनाने वाली तीन कंपनियों को इसका काम देता है। इसमें एक कंपनी एमपी एग्रो न्यूट्री फूड है। बाकी दो कंपनियां मप्र एग्रो फूड इंडस्ट्री और एमपी एग्रोटॉनिक्स लिमिटेड हैं।

मुख्य किरदार में अफसर

रवींद्र चतुर्वेदी :डिप्टी मैनेजर से एमपी एग्रो में भर्ती हुए। महाप्रबंधक बने। इस समय पोषण आहार का पूरा काम इनके पास है। ये पूर्व में पाठ्यपुस्तक निगम और माध्यमिक शिक्षा मंडल में भी रह चुके हैं। 
वी धवल : तृतीय श्रेणी में भर्ती होकर प्रथम श्रेणी अधिकारी बने। वर्ष 2007-08 से ही पोषण आहार की जिम्मेदारी संभाल रहे हैं। गत 30 जून को सेवानिवृत्त हो गए, लेकिन सरकार ने तीन दिन पहले ही इन्हें जीएम पद पर संविदा नियुक्ति दी है।

सरकारी आवास के कमरे सील

-दीक्षित के चार इमली स्थिति सरकारी आवास के कमरे सील करने के लिए नए ताले लाने पड़े। वे इस समय न भोपाल में हैं और न ही इंदौर में।
-लिहाजा उनकी अनुपस्थिति के कारण भोपाल में छापों की कार्रवाई उनके आने के बाद शुरू की जाएगी।
वॉट्सऐप पर एक्टिव
-आयकर विभाग की टीम ने सुबह 7 से 8 बजे के बीच ही सभी ठिकानों पर एक साथ दबिश डाली।
-दीक्षित मौके पर नहीं थे, लेकिन एक वॉट्सऐप ग्रुप पर वे 3 बजकर 9 मिनट पर एक्टिव हुए। तब तक छापे की कार्रवाई सुर्खियों में बदल गई थी। वे करीब चार बजे तक एक्टिव रहे।
पोषण आहार बनाने वाली कंपनियों पर कार्रवाई की जा रही है
आंगनबाड़ियों में सप्लाई हो रहे पोषण आहार बनाने वाली कंपनियों पर कार्रवाई की जा रही है। इसमें मुंबई के साथ भोपाल व इंदौर के इनके ऑफिस व घर शामिल हैं। जांच में यही पोषण आहार की गुणवत्ता में कमी से जुड़ी जानकारी आती है तो उसे संबंधित विभाग को भेज दिया जाएगा।
एके जायसवाल, डीजी इन्वेस्टिगेशन, इनकम टैक्स (मप्र-छग)
रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई
एमपी एग्रो के जिन अफसरों पर कार्रवाई हुई है, आयकर विभाग से रिपोर्ट मिलने के बाद कार्रवाई के बारे में विचार किया जाएगा। वे एमपी एग्रो की ओर से कंपनी में नॉमिनी डायरेक्टर थे। 
एसके मिश्रा, एमडी, एमपी एग्रो
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हृदयेश दीक्षित ने कबूली काली कमाई, सरेंडर किए पांच करोड़

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By Dabangdunia News Service | Publish Date: Aug 18 2016 10:27AM 

विनोद शर्मा इंदौर। दलिया किंग एमपी एग्रो द्वारा 50 करोड़ रुपए सरेंडर किए जाने के महीनेभर बाद आखिरकार प्रदेश टूडे और एमपी टुडे मीडिया समूह के डायरेक्टर हृदयेश दीक्षित ने भी पांच करोड़ की काली कमाई सरेंडर कर दी है। भक्त प्रहलादनगर स्थित समूह के आॅफिस से प्रोबेशन आॅर्डर (पीओ) मंगलवार को हटा लिया गया है जबकि भोपाल के एक ठिकाने पर अब भी पीओ कायम है।

पोषण आहार बनाने वाली एमपी एग्रो, एमपी टुडे और प्रदेश टुडे समूह के खिलाफ इनकम टैक्स की इन्वेस्टिगेशन विंग ने महीनेभर पहले छापेमार कार्रवाई की थी। कार्रवाई के बाद एमपी एग्रो और उसकी सहयोगी कंपनियों ने जहां 50 करोड़ की काली कमाई सरेंडर कर दी थी वहीं टुडे समूह के संचालक और उनके सीए अड़े रहे। हालांकि दीक्षित बंधुओं के खिलाफ अपने हाथ में पुख्ता प्रमाण लिए बैठी रही इन्वेस्टिगेशन विंग के आगे ज्यादा अकड़ चली नहीं। अंतत: लंबी ना-नुकुर और फोनबाजी के बाद दीक्षित बंधुओं को पांच करोड़ की काली कमाई सरेंडर करना पड़ी। आयकर अधिकारियों की मानें तो असेसमेंट तक काली कमाई का यह आंकड़ा और बढ़ेगा।

पीओ खुला
इंदौर, भोपाल और मुंबई सहित 35 स्थानों पर कार्रवाई हुई थी। भक्त प्रहलादनगर स्थित दीक्षित बंधुओं के कार्यालय और भोपाल में एक स्थान पर कार्रवाई को अल्प विराम देते हुए प्रोबेसरी आॅर्डर (पीओ) लगाया गया था। लंबे इंतजार के बाद इंदौर विंग के अधिकारियों ने मंगलवार को भक्त प्रहलादनगर में पीओ खोल दिया। कई महत्वपूर्ण दस्तावेज बरामद किए।

लॉकर खुलना बाकी है 
भोपाल विंग ने चार इमली स्थित हृदयेश दीक्षित के निवास पर छापेमार कार्रवाई की थी। भोपाल में कुछ लॉकर भी मिले थे। जिन्हें विंग ने आॅपरेट करना शुरू कर दिया है। इंदौर में भी कुछ लॉकर खोले गए हैं हालांकि लॉकर में ज्यादा कुछ मिला नहीं है। इसे 2007 में हुई रेड से मिले सबक की निशानी कहा जा रहा है।

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