नागदा में गंभीर जल, वायु और भूमि प्रदूषण सहित विभिन्न जनहित के मुद्दों पर 6 सदस्यीय जांच दल का गठन

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ब्यूरो चीफ नागदा, जिला उज्जैन // विष्णु शर्मा 8305895567

नागदा. विगत दिनों कांग्रेस नेता दीपक पप्पी शर्मा द्वारा राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग में की गई शिकायत के पश्चात जिला कलेक्टर, उज्जैन को जारी नोटिस के संबंध में जिला कलेक्टर, उज्जैन द्वारा 6 सदस्यीय जांच समिति का गठन किया गया हैं । जिसकी अध्यक्षता अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) नागदा को सौंपी गई है ।

शर्मा ने बताया कि समिति में श्री एस. के. अग्रवाल, कार्यपालन यंत्री, लोक स्वास्थ्य यांत्रिकी, डॉ. अनुसूईया गवली, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी उज्जैन, श्री सतीश मट्सैनिया सीएमओ नगरपालिका परिषद् नागदा, श्री एस. एन. द्विवेदी, क्षेत्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड अधिकारी एवं श्री आत्माराम सोनी, महाप्रबंधक, ओद्यौगिक विकास निगम को जांच दल में सदस्य के रूप में शामिल किया गया हैं। एवं उक्त जांच समिति को गठन होने के 15 दिवस के भीतर अपना प्रतिवेदन शासन को प्रस्तुत करना हैं जिसे राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग की नई दिल्ली बेंच को प्रेषित किया जाएगा ।

शर्मा ने बताया कि जांच समिति का गठन उनके द्वारा पूर्व में राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग, नई दिल्ली बेंच के समक्ष प्रस्तुत की गई याचिका के संबंध में जिला कलेक्टर, उज्जैन को जारी नोटिस के संबंध में की गई हैं । जांच समिति द्वारा नागदा में ओद्यौगिक इकाइयों द्वारा फैलाए गए प्रदूषण की जांच की जाएगी और इसके साथ ही विभिन्न विषयों पर विस्तार से जांच करवाकर उसकी एक रिपोर्ट तैयार करवाई जाएगी जिसके माध्यम से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के समक्ष दर्ज प्रकरण में उद्योग के जिम्मेदार अधिकारियों के विरूद्ध कठोर दंडात्मक कार्यवाहीं करवाई जा सकेगी। इसके साथ ही विगत 10 वर्षों में मरने वाले श्रमिकों के संबंध में भी बड़ी कार्यवाही नहीं होने पर जांच प्रतिवेदन प्रस्तुत किया जाना हैं ।

याचिका में इनके विरूद्ध होना हैं कार्यवाही –

याचिकाकर्ता दीपक शर्मा ने बताया कि आयोग द्वारा के. सुरेश यूनिट हेड, ग्रेसिम इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड, योगेंद्र सिंह रघुवंशी, वाइस प्रेसिडेंट, ग्रेसिम इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड, प्रेम तिवारी यूनिट हेड, ग्रेसिम केमिकल डिवीजन, संजय सिंह यूनिट हेड, लेक्सेस इंडिया प्राइवेट लिमिटेड एवं वीनू क़ौशी, यूनिट हेड, गुल ब्रांड सन लिमिटेड नागदा आदि को समस्त ओद्यौगिक क्रियाकलाप का जिम्मेदार मानते हुए उनके नाम भी नोटिस में शासन को भेजे गए हैं ।

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