जनसंपर्क के सहायक संचालक मुकेश दुबे पर राज्य सूचना आयोग ने ₹25000 का जुर्माना ठोका, अधिरोपित शास्ति प्रत्यर्थी की सेवा पुस्तिका में अंकित करने का निर्णय

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सूचना के अधिकार की धज्जियां उड़ाने वाले जनसंपर्क के सहायक संचालक मुकेश दुबे पर राज्य सूचना आयोग ने ₹25000 का जुर्माना

भोपाल। मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग के राज्य मुख्य सूचना आयुक्त माननीय श्री एके शुक्ला ने मंगलवार 10 नवंबर 2020 को अपील प्रकरण क्रमांक ए 3140 के मामले में सुनवाई करते हुए मध्य प्रदेश जनसंपर्क विभाग भोपाल के तात्कालिक लोक सूचना अधिकारी सहायक संचालक मुकेश दुबे को दोषी मानते हुए 25000 के जुर्माने से दंडित किया।

उक्त आदेश से जनसंपर्क विभाग में खलबली मच गई है वहीं लोगों की आस्था राज्य सूचना आयोग के निष्पक्ष निर्णय से विश्वास बढ़ा है मामले के संबंध में बताया गया है कि श्री विनय जी डेविड ने जनसंपर्क विभाग में सूचना के अधिकार के तहत दिनांक 19 अप्रैल 2018 को जनसंपर्क विभाग द्वारा वेबसाइट न्यूज़ पोर्टल को दिए गए विज्ञापनों की चाही थी जिस पर जनसंपर्क विभाग में पदस्थ लोक सूचना अधिकारी मुकेश दुबे ने निर्धारित समय पर जानकारी उपलब्ध नहीं कराई जिससे प्रतिवेदन होकर पत्रकार विनय जी डेविड ने राज्य सूचना आयोग के समक्ष द्वितीय अपील प्रस्तुत कर जानकारी उपलब्ध नहीं कराए जाने व दोषी अधिकारियों को दंडित करने का निवेदन किया था।

राज्य सूचना आयोग

मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग के द्वारा सूचना के अधिकार नियम के तहत कार्रवाई नहीं करने वाले लोक सूचना अधिकारियों को विधि विरुद्ध अनुसार शास्ति अधिरोपित करने सूचना के अधिकार अधिनियम 2005 की धारा 20(1 ) के तहत कारण बताओ सूचना पत्र जारी किया था। जिसमें अपना पक्ष रखने के लिए 16 अक्टूबर 2020 को उपस्थित होकर प्रस्तुत करने को कहा था। परंतु उक्त प्रकरण में तात्कालिक लोक सूचना अधिकारी मुकेश दुबे उपस्थित नहीं हुए वही राज्य सूचना आयोग में वर्तमान लोक सूचना अधिकारी दुर्गेश रैकवार ने उपस्थित होकर जवाब प्रस्तुत किया, उन्होंने ढाई पृष्ठ का लिखित जवाब देते हुए मुख्य सूचना आयुक्त के समक्ष पूरा प्रकरण मेरी अवधि के पूर्व का है जानकारी देते हुए अवगत कराया कि प्रकरण के समय जनसंपर्क संचनालय में लोक सूचना अधिकारी श्री जीएस वाधवा संयुक्त संचालक और उक्त समय में मुकेश दुबे सहायक संचालक लोक सूचना अधिकारी नियुक्त थे।

उक्त प्रकरण में लोक सूचना मुख्य आयुक्त ने तात्कालिक जनसंपर्क अधिकारी मुकेश दुबे को 6 नवंबर 2020 को आयोग के सामने कारण बताओ नोटिस का जवाब देने उपस्थित होकर जवाब चाहा था। लोक सूचना अधिकारी मुकेश दुबे ने आयोग के सामने अपना पक्ष रखते हुए जितनी भी दलीले दी वह कोई भी काम नहीं आ सकी, मुकेश दुबे ने इस प्रकरण में आयोग के सामने की गई लापरवाही का ठीकरा संबंधित विभाग में पदस्थ क्रांति दीपालु ने पर थोपने का प्रयास किया आयोग ने इस दलील को भी आस्वीकार कर दिया।

आयोग ने कड़ी टिप्पणी करते हुए माना कि लोक सूचना अधिकारी ने अपने कर्तव्य का पालन समय से नहीं किया और अपीलार्थी को गुमराह करते रहे। बावजूद जानकारी उपलब्ध न कराने पर 10 नवंबर 2020 को सुनवाई करते हुए राज्य सूचना आयुक्त ने लोक सूचना अधिकारी मुकेश दुबे को दोषी पाया की लापरवाही स्पष्ट रूप से पाई गई, जिसके तहत उक्त जुर्माने की राशि 1 माह में किए जाने के आदेश पारित किया वही नियत अवधि में राशि जमा नहीं कराने पर मध्य प्रदेश सूचना के अधिकार (फीस तथा अपील) नियम 2005 के नियम 8(6) के तहत अग्रिम कार्रवाई की जाएगी।

वही अधिरोपित शास्ति की वसूली हेतु स्पष्ट जिला जनसंपर्क संचलनालय मध्य प्रदेश भोपाल के लोक प्राधिकारी को निर्देशित किया है कि मुकेश दुबे प्रत्यर्थी पर ₹25000 अधिरोपित शास्ति की टीप प्रत्यर्थी की सेवा पुस्तिका में अंकित की जावे जिससे लोक सूचना अधिकारी से सेवा काल में वसूली नहीं होने पर अंतिम भुगतान के समय उनके देयकों से यह राशि वसूल की जाकर शासकीय कोषालय में जमा कराई जा सके।

आयोग के आदेश के उपरांत अभी भी चाही गई जानकारी अपीलार्थी को नहीं दी गई

इस पूरे मामले में माननीय मुख्य सूचना आयुक्त मध्य प्रदेश राज्य सूचना आयोग ने अपीलार्थी विनय जी डेविड को संपूर्ण जानकारी देने के आदेश 13 जुलाई 2020 को एक माह ( 30 दिवस ) के अंदर प्रमाणिक दस्तावेज को देने का फैसला दिया । उक्त आदेश के समय लोक सूचना अधिकारी दुर्गेश रैकवार है और फैसले के समय आयोग के समक्ष उपस्थित भी रहे और अपीलार्थी विनय जी डेविड को आयोग के समक्ष 71 पृष्ठ की कंप्यूटरकृत तैयार करके प्रमाणित जानकारी भी उपलब्ध कराई थी। शेष जानकारी आयोग के आदेश के उपरांत भी अभी तक अपीलार्थी को प्रदान नहीं की गई है।

 

 

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