छत्तीसगढ़: भिलाई के स्टील से तैयार होगी राकेट लांचर की टंकी

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विशेष संवाददाता

छत्तीसगढ़ के भिलाई में राकेट लांचर के फ्यूल टैंक के लिए यूरोपीय देशों पर हमारी निर्भरता समाप्त होने जा रही है. भारत को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) का यह बड़ा योगदान होगा. इसरो के अंतरिक्ष अभियान के लिए बीएसपी द्वारा तैयार बेहतर गुणवत्तायुक्त स्टील इसी सप्ताह मिश्रित धातु निगम लिमिटेड को भेजा जाएगा. इसी स्टील से टैंक के लिए 11 परत वाले प्लेट का निर्माण किया जाएगा.

भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) की फाइल फोटो।

अजमत अली, भिलाई। राकेट लांचर के फ्यूल टैंक (ईधन की टंकी) के लिए अन्य देशों पर निर्भरता समाप्त होने जा रही है। दरअसल, देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में भिलाई इस्पात संयंत्र (बीएसपी) ने कदम बढ़ाया है। इसी कड़ी में राकेट लांचर के फ्यूल टैंक बनाने के लिए संयंत्र में विशेष स्टील प्लेटें तैयार की जाएंगी। इन स्वदेसी प्लेटों का प्रयोग इसरो के प्रथम मानवयुक्त उपग्रह मिशन कार्यक्रम ‘गगनयान 2022” के प्रक्षेपण में किया जाएगा।

भिलाई इस्पात संयंत्र ने ‘आत्मनिर्भर भारत’ की दिशा में बढ़ाया अहम कदम

इसरो (भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन) के अंतरिक्ष अभियान के लिए यहां तैयार गुणवत्तायुक्त स्टील इसी सप्ताह मिश्रित धातु निगम लिमिटेड को भेजी जाएगी। मुख्य महाप्रबंधक जेके सेठी और निरीक्षण मुख्य महाप्रबंधक (गुणवत्ता) एसके कर के निर्देश व नेतृत्व में तैयार यह प्लेटें मिश्र धातु निगम लिमिटेड के विशेषज्ञों की मौजूदगी में कड़े निरीक्षण व कठोर परीक्षण से गुजारी गई हैं।

इन्हीं स्टील प्लेटों से टैंक के लिए 11 परत वाली एमडीएन-250 प्लेट का निर्माण किया जाएगा। 9.3 मिलीमीटर की मोटाई वाली स्टील की विशेष प्लेट के कारण टैंक पर वातावरण के घर्षण का प्रभाव नहीं पड़ेगा। पूर्व में आस्टि्रया और रूस आदि देशों से यह विशेष प्लेट मंगाई जाती थी। सैटेलाइट वाहन के दोनों ओर फ्यूल टैंक होता है।

देश को आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में मील का पत्थर

बीएसपी (प्लेट मिल) के महाप्रबंधक एमके गोयल ने कहा कि एमडीएन-250 प्लेटों को बेहद कड़े मापदंडों के साथ तैयार किया जाता है। इसके लिए तकनीकी हुनर के साथ-साथ परिचालन दक्षता की जरूरत होती है। बीएसपी का प्लेट मिल इसमें निपुणता हासिल कर चुका है। हमारा यह प्रयास देश को आत्मनिर्भर बनाने में मील का पत्थर साबित होगा।

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