ग्रेसिम इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड स्टेपल फाइबर डिवीजन के प्लांट विस्तारीकरण की लोक सुनवाई का मामला सुप्रीम कोर्ट में मंजूर, याचिकाकर्ता ने की निरस्त करने की मांग

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TOC NEWS @ www.tocnews.org

ब्यूरो चीफ नागदा, जिला उज्जैन // विष्णु शर्मा 8305895567

नागदा- मेहतवास, बिरलाग्राम, नागदा में ग्रेसिम इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड के विस्कोस स्टेपल फाइबर डिवीजन के विस्तारीकरण के संबंध में दिनांक 05/09/2019 को एसडीएम कार्यालय नागदा में आयोजित की गई लोक सुनवाई को निरस्त करने के संबंध में कांग्रेस नेता दीपक ‘पप्पी’ शर्मा द्वारा माननीय सुप्रीम कोर्ट में दिनांक 07/01/2020 को दायर याचिका को सुप्रीम कोर्ट द्वारा स्वीकार करते हुए उसे पंजीकृत करते हुए केस डायरी क्रमांक 2386/SCI/PIL(E)2020 प्रदान कर दिया गया हैं जिसकी जानकारी याचिकाकर्ता को प्रदान की गई हैं ।

याचिकाकर्ता दीपक शर्मा ने बताया कि उक्त प्रकरण में माननीय सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश शरद अरविंद बोबाडे के समक्ष 19 बिंदुओं पर ध्यान आकर्षित करवाते हुए उक्त लोक सुनवाई को निरस्त करने हेतु अपील की गई हैं ।

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याचिकाकर्ता दीपक शर्मा ने बताया कि उक्त लोक सुनवाई का आयोजन ही अनुचित था क्योंकि जिस भूमि पर विस्तारीकरण होना हैं वह भूमि एक विवादित भूमि हैं और वर्तमान में उसका प्रकरण माननीय सुप्रीम कोर्ट में मध्यप्रदेश शासन विरूद्ध ग्रेसिम इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड विचाराधीन हैं । इस बात का संज्ञान होने के बावजूद शासन द्वारा लोक सुनवाई का आयोजन ताबड़तोड़ करवाया गया यहीं नहीं अरबों रुपए की शासकीय भूमि को ग्रेसिम इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड को दिलवाने में भी शासन के कई अधिकारियों की सांठगांठ के माध्यम से सुप्रीम कोर्ट में विचारधीन केस को कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा हैं ।

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याचिकाकर्ता दीपक शर्मा ने प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और पर्यावरण मंत्रालय पर भी आरोप लगाया हैं कि किसी भी वक़्त ग्रेसिम इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड को पर्यावरणीय स्वीकृति का प्रमाण पत्र जारी किया जा सकता हैं इसीलिए इस याचिका को लगाना अतिआवश्यक विषय था । इसके साथ ही जिन 19 बिंदुओं पर माननीय सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की गई हैं उसमें शामिल कुछ प्रमुख बिंदु निम्नलिखित हैं जिन्हें याचिका में शामिल किया गया है – मेहतवास को ग्राम दर्शाना, भारत कामर्स की विवादित भूमि को अपना दर्शाना, पानी की खपत बड़ाना और क्षेत्र में पानी की कमी होना, बिजली प्लांट का विस्तारीकरण की अनुमति मांगना जिससे प्रदूषण और बढ़ेगा क्योंकि कोयले कि खपत बढ़ेगी, नए जल स्त्रोत स्थापित नहीं होना.

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नागदा और ग्रामीण क्षेत्रों में सीएसआर के तहत कोई बड़ी उपलब्धि नहीं होना, प्लांट का विस्तारीकरण शहर के मध्य होना, प्लांट में जिंक का उपयोग दर्शाना जिसके उपयोग से पूर्व में ही चंबल नदी डाउन स्ट्रीम में मृत हो चुकी हैं, प्रदूषण से 22 गावों में गंभीर प्रभाव होना, प्लांट में कास्टिक सोडा का भारी उपयोग होना जो मानव जीवन के लिए खतरनाक हैं, प्लांट विस्तारीकरण की ईआईए रिपोर्ट और कार्यकारी सारांश अंग्रेजी में होना एवं चंबल नदी के समस्त जल स्त्रोतों पर ग्रेसिम इंडस्ट्रीज़ लिमिटेड का अधिपत्य होना और चंबल नदी का प्रदूषित घोषित हो जाना आदि सहित कई अन्य बिंदुओं पर सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अपील करते हुए लोक सुनवाई को निरस्त करने का निवेदन किया है ।

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