केरलिन देशमुख, पी नरहरि जैसे अधिकारीयों के कारण न्यायालय के आदेशों की अवहेलना जारी रही तो न्याय से भरोसा उठ जाएगा, हाइकोर्ट अवमानना का दोषी अधिकारियों को गिरफ्तार कर बुलाने की चेतावनी

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विशेष ख़बर  :  विनय जी डेविड  : 9893221036 

विनय जी डेविड  : 9893221036 

  • प्रमुख सचिव केरलिन देशमुख, आयुक्त पी नरहरि और प्राचार्य आरसी पांडे हाइकोर्ट अवमानना का दोषी, अधिकारियों को गिरफ्तार कर बुलाने की चेतावनी
  • आयुक्त पी नरहरि हाईकोर्ट के आदेशो की धज्जियां उड़ाने में माहिर है, अन्य मामले में भी हाईकोर्ट को गुमराह कर झूठी जानकारी देना का रिकॉर्ड इनके ही नाम
  • आदेश का पालन नहीं होने पर अधिकारियों को गिरफ्तार कर बुलाने की चेतावनी

जबलपुर । मध्य प्रदेश हाई कोर्ट ने तकनीकी शिक्षा विभाग की प्रमुख सचिव केरलिन देशमुख, आयुक्त पी. नरहरि व प्राचार्य शासकीय पॉलिटेक्निक, जबलपुर आरसी पांडे को प्रथम दृष्ट्या अवमानना का दोषी पाया।

जस्टिस संजय द्विवेदी की पीठ ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि न्यायालय के आदेशों की इस तरह अवहेलना की जाएगी तो जनता का न्याय पर से भरोसा ही उठ जाएगा।

एकल पीठ ने चेतावनी दी है कि आदेश का पालन नहीं होने पर डीजीपी को निर्देश दिए जाएँगे कि अधिकारियों को गिरफ्तार कर हाईकोर्ट में पेश किया जाए। एकल पीठ ने सजा के प्रश्न पर सुनवाई के लिए 23 अक्टूबर की तिथि नियत की है।

यह अवमानना याचिका जबलपुर निवासी प्रवीण चंद्र चौबे की ओर से दायर की गई है। याचिका में कहा गया कि उन्हें पॉलीटेक्निक कॉलेज जबलपुर से व्याख्याता प्रिटिंग के पद से जनवरी 2018 में 62 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्त कर दिया गया था। हाईकोर्ट की एकल पीठ ने 28 जून 2018 को उन्हें 65 वर्ष तक सेवा करने और बहाली का आदेश दिया था।

इस मामले में विभाग की ओर से हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में अपील की गई, लेकिन दोनों अपील खारिज हो गई। इसके बाद भी उन्हें सेवा में बहाल नहीं किया गया। बुधवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से सुनवाई के दौरान तकनीकी शिक्षा आयुक्त पी नरहरि ने  एकल पीठ को बताया कि आदेश का पालन करने की फाइल विभाग के मंत्री के पास लंबित है। इस पर एकल पीठ ने कड़ी नाराजगी जाहिर की।

कोर्ट ने उक्त अधिकारियों की सजा पर सुनवाई 23 अक्टूबर तक स्थगित कर दी। साथ ही चेतावनी दी कि आदेश का पालन न किए जाने पर पुलिस महानिदेशक को इन सभी अधिकारियों को गिरफ्तार कर न्यायालय के समक्ष पेश किए जाने के निर्देश दिए जाएंगे। यह निर्देश जबलपुर निवासी प्रवीण चंद्र चौबे की याचिका पर दिया गया। उन्हें व्याख्याता ([प्रिंटिंग)] के पद से जनवरी 2018 में 62 वर्ष की उम्र में सेवानिवृत्त कर दिया गया था। इसके खिलाफ दायर याचिका पर हाई कोर्ट ने 28 जून, 2018 को उन्हें सेवा में वापस लिए जाने का निर्देश दिया। इसके विरद्घ सरकार की ओर से दायर याचिका सुप्रीम कोर्ट से भी खारिज कर दी, फिर भी हाई कोर्ट के आदेश का पालन नहीं किया गया. याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता समदर्शी तिवारी और अधिकारियों की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता पुष्पेन्द्र यादव ने पक्ष रखा।

जानकार सूत्रों की माने तो पी नरहरि मध्य प्रदेश शासन के निर्णय लेने में सबसे असक्षम अधिकारी हैं, हमेशा वह भ्रष्टाचार और भ्रष्टाचारियों का साथ ही देते हैं चाहे शासन को करोड़ों की चपत क्यों न लग जाए। इनके सही निर्णय नहीं लेने की वजह से अनेकों मामले हाईकोर्ट के शरण में पहुंच रहे हैं, बार-बार हाईकोर्ट से अवमानना नोटिस जारी होना ऐसे अधिकारियों की नियत पर सवाल खड़ा करता है, सरकार को भ्रष्टाचारियों की वजह से करोड़ों का नुकसान हो और ऐसे अधिकारी उनको बचाने का काम सरकार को जानबूझकर क्षति पहुंचाने का षड्यंत्र है ऐसे अधिकारियों अगर शासकीय सेवा में रहे तो सरकार को भी क्षति पहुंचाने से कोई नहीं रोक सकता ।

हाईकोर्ट ने पूछा- फर्जी न्यूज वेबसाइट्स के खिलाफ क्यों नहीं की कार्रवाई, जनसंपर्क प्रमुख सचिव और आयुक्त को नोटिस जारी दें जबाब

जबलपुर. मप्र हाईकोर्ट ने फर्जी तरीके से संचालित की जा रही न्यूज वेबसाइट्स संचालन के मामले पर कार्रवाई न किए जाने का आरोप गंभीरता से लिया। जस्टिस मोहम्मद फहीम अनवर की सिंगल बेंच ने जनसंपर्क विभाग के प्रमुख सचिव संजय शुक्ला व कमिश्नर पी नरहरि से पूछा कि याचिकाकर्ता की शिकायत पर कोर्ट के निर्देश के बावजूद कार्रवाई क्यों नहीं की गई? दोनों अधिकारियों को अवमानना नोटिस जारी कर जवाब मांगा गया।

भोपाल के विनोद मिश्रा ने याचिका दायर कर कहा कि प्रदेश में कई वर्षों से फर्जी न्यूज वेबसाइट्स को विज्ञापन बांटने का सिलसिला जारी है। उन्होंने 7 फरवरी 2017 को जनसंपर्क विभाग को शिकायत की थी कि कई वेबसाइट संचालक फर्जी तरीके से गूगल एनालिसिस रिपोर्ट व फर्जी दस्तावेज तैयार कर सरकारी विज्ञापन प्राप्त कर रहे थे। लेकिन दो साल बाद भी शिकायत पर कोई कार्रवाई नहीं हुई।

इस पर हाईकोर्ट ने 27 अगस्त 2019 को उनकी याचिका निराकृत करते हुए जनसंपर्क विभाग के अधिकारियों को अभ्यावेदन पर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई का निर्देश दिया। अधिवक्ता मानसमणि वर्मा ने कोर्ट को बताया कि इस आदेश की प्रति के साथ उक्त दोनो अधिकारियों को अभ्यावेदन दिया गया, लेकिन कुछ नहीं हुआ। इस पर अवमानना याचिका पेश की गई।

उन्होंने तर्क दिया कि इन फर्जी वेबसाइट्स के जरिए विज्ञापन से सरकार को तगड़ी चपत लगाई जा रही है। सुनवाई के बाद कोर्ट ने अनावेदक बनाए गए अधिकारियों को नोटिस जारी किए।

उक्त प्रकरण में साइबर थाना भोपाल द्वारा जांच की गई जिस पर जनसंपर्क विभाग द्वारा फर्जी वेबसाइट संचालकों को बचाने का भरपूर प्रयास किया, साइबर थाने ने अपनी जांच में पाया कि उक्त प्रकरण में 420 467 468 एवं 120 बी के तहत अपराध किए गए हैं वहीं अभियोजन पक्ष ने इस पर अपनी राय व्यक्त की है कि जनसंपर्क विभाग की भूमिका संदिग्ध है इसलिए विभाग से संबंधित अधिकारियो और कर्मचारियों और वेबसाइट संचालकों की संदिग्ध भूमिका है सांठगांठ है। इस सांठगांठ का  सरकार को प्रतिमाह लाखों करोड़ों रुपए का नुकसान हो रहा है।

उक्त प्रकरण में जांच में समय लगने और जनसंपर्क विभाग द्वारा जांच में सहयोग नहीं करने के कारण पत्रकार संगठन को माननीय हाईकोर्ट की शरण में जाना पड़ा । इस मामले में ‘ऑल इंडिया स्माल न्यूज पेपर एसोसिएशन” ( आइसना ) प्रदेश अध्यक्ष विनोद मिश्रा ने फर्जी वेबसाइट के मामले में एक याचिका प्रस्तुत की जिस पर मध्यप्रदेश हाईकोर्ट के माननीय न्यायाधीपति श्री विशाल धागट जी ने आज दिनांक 27 अगस्त 2019 को अपने आदेश में प्रमुख सचिव जनसंपर्क एवं आयुक्त जनसंपर्क को शिकायत की जांच कर निराकरण करने के निर्देश दिए है।

फर्जी वेबसाइट घोटाले में याचिकाकर्ता विनोद मिश्रा के के एडवोकेट श्री मानसमणि वर्मा जी ने माननीय न्यायालय से उक्त प्रकरण में अविलंब जांच कर दोषियों के खिलाफ कार्रवाई करने को जोरदार तरीके से प्रस्तुत किया, याचिका में फर्जी वेबसाइट संचालकों में कथित अवधेश भार्गव की मुख्य भूमिका है इनके साथ ही अन्य आरोपी अवनीश कुमार भार्गव, जितेंद्र भार्गव, संजय रायजादा, प्रदीप तिवारी, निशांत तिवारी, प्रशांत तिवारी, राकेश शर्मा, के के पियासी, रवि चटर्जी, सुबोध, कार्तिक, सतीश सिंह, जय कुमार शर्मा, एनडब्ल्यून्यूज़डॉटकॉम वेब डेवलपर नर्सिंग सेगर याचिका में आरोपी शामिल है।

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