कानून रद्द करने से कम कोई शर्त मानने को तैयार नहीं किसान

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सोनीपत: नये कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन कर रहे किसानों ने कानून रद्द करने से कम कोई शर्त मानने से इनकार कर दिया है। किसान नेताओं ने कहा कि केंद्र सरकार उन्हें गुमराह कर रही है और अब वह सड़क के साथ रेल ट्रैक भी रोकेंगे। यह आंदोलन एक साथ पूरे देश में होगा। यह आंदोलन कैसे और कब होगा, इसके लिए केंद्रीय समिति प्रारूप को अंतिम रूप दे रही है।

किसान नेताओं बूटा सिंह बुर्जगिल, डा. दर्शनपाल सिंह व बलबीर सिंह राजेवाल आदि ने केंद्रीय कृषि मंत्री और बिजली मंत्री की प्रैस वार्ता को आधार बनाकर अपनी बात रखी। इस वार्ता में उठाए गए मुद्दों पर किसान नेताओं ने कहा कि आज केंद्र सरकार ने सबके सामने स्वीकार कर लिया है कि तीनों कानून सही नहीं है। उन्होंने सवाल किया कि जब दोनों मंत्री कह रहे हैं कि यह स्टेट का मैटर है, तो केंद्र ने कृषि कानून क्यों बनाया। दूसरा कोरोना के दौरान ऐसी क्या आफत आ गई थी कि कानून बनाने पड़े, किस लिए बनाए, जब किसानों ने ऐसी कोई मांग ही नहीं की थी?

केवल न बोलने के लिए वार्ता के लिए नहीं जाएंगे : किसानों ने कहा कि मंत्रियों ने स्वीकार कर लिया है कि ये कानून कारपोरेट और ट्रैडिंग के लिए हैं। यानी इसमें किसान के लिए तो कुछ है ही नहीं। ऐसे में किसानों को वार्ता और सुधार के नाम पर क्यों गुमराह किया जा रहा है? केंद्र सरकार इसका हर हाल में जवाब दे कि वह दोगली नीति क्यों अपना रही है? उन्होंने कहा कि बातचीत का रास्ता बंद नहीं किया गया है, लेकिन अब वे कंकरीट ड्राफ्ट के बिना केवल न बोलने के लिए वार्ता के लिए नहीं जाएंगे।

किसान नेता बुर्जगिल ने कहा कि एक झूठ ड्राफ्ट में केंद्र सरकार ने यह लिखकर दिया कि जमीन कुर्की का कोई प्रावधान नहीं है जबकि इस कानून में 14/7 पर लिखा हुआ कि जमीन कुर्की करने का हक कंपनी को होगा।

 

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