कमलनाथ सरकार गिराने वाले विधायकों पर 6 साल तक कोई भी चुनाव न लडने पर पाबंदी लगाने की गुहार लगाई, सुप्रीम कोर्ट याचिका पर विचार के लिए तैयार, चुनाव आयोग को भी नोटिस भेजा

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भोपाल: सुप्रीम कोर्ट ने उस याचिका पर परीक्षण करने का निर्णय लिया है जिसमें कमलनाथ सरकार को गिराने के मकसद से इस्तीफा देने वाले विधायक देने वाले विधायकों पर 6 वर्ष तक चुनाव लड़ने और कोई भी सार्वजनिक पद लेने पर पाबंदी लगाने की गुहार लगाई है। चीफ जस्टिस एसए बोबड़े, जस्टिस एएस बोपन्ना और जस्टिस वी रामसुब्रमण्यम की पीठ ने मध्य प्रदेश कांग्रेस नेता जया ठाकुर की इस याचिका पर चुनाव आयोग और केंद्र सरकार को नोटिस जारी किया है। पीठ ने उनसे 4 हफ्ते में जवाब मांगा है।

वकील वरिंदर कुमार शर्मा के जरिये दायर याचिका में कहा गया है कि दलबदलू को विधायिका के मौजूदा कार्यकाल तक किसी भी पारिश्रमिक वाले पद लेने से वंचित किया जाना चाहिए ताकि वर्तमान सरकार को उखाड़ फेकने के लिए इस्तीफा देने की भ्रष्ट प्रथा को हतोत्साहित किया जा सके। विधायक और सांसद के चुनाव में सरकारी खजाने पर बोझ पड़ता है लेकिन वे निजी लाभ के लिए अपनी मर्जी से इस्तीफा दे रहे है।

कमलनाथ सरकार को गिराया था

मप्र में कमलनाथ सरकार इसी तरह विधायकों के इस्तीफा देने के कारण गिर गई थी। प्रदेश में 21 कांग्रेस विधायक ने एक मुश्त इस्तीफा देकर भाजपा का दामन थाम लिया था इसके चलते कमलनाथ सरकार गिर गई थी इसके बाद 5 अन्य विधायक भी कांग्रेस छोड़कर भाजपा में शामिल हो गए थे। कांग्रेस ने इन विधायकों के खरीद फरोख्त का आरोप लगाया था इसके बाद राज्य में हुए उपचुनावों में भाजपा ने इस्तीफा देने वाले सभी नेताओं को टिकट दिया था। दूसरी ओर राजस्थान में भी कांग्रेस लगातार आरोप लगा रही है कि बीजेपी उसके विधायकों को तोड़कर सरकार गिराना चाहती थी।

 

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