आबकारी एसी संजीव दुबे की गंभीर लापरवाही और सांठ-गांठ से 40 करोड़ 40 लाख का बैंक चालान फर्जीवाड़ा

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  • सरकार के साथ धोखा, फिर भी कारवाई नही !
  • बत्ती लगाने की नही ,देने की चीज है – पीएस
  • कलेक्टर भी घेरे में आए ,भेजी रिपोर्ट
  • विभाग की इज्जत बेच दी ,हर अफसर पर शक की नजर

5 अफसरो की कमेटी ,15 दिन ,करवाई जीरो

 

 

इंदौर (राजेन्द्र के. गुप्ता ) आबकारी एसी संजीव दुबे की गंभीर लापरवाही और सांठ – गांठ से 40 करोड़ 40 लाख का बैंक चालान फर्जीवाड़ा कर डेढ़ साल तक शराब ठेकेदार सरकार को खुलेआम धोखा देते रहे और भारी राजस्व की हानि पहुँचाते रहे ,जिम्मेदार एसी संजीव दुबे इस अवधि में अपने हर कर्तव्य के प्रति गंभीर लापरवाह बने रहे । इससे ऐसा लगता है एसी दुबे ने जानबूझकर शराब ठेकेदारों को खुले आम सरकार से धोखा करने और राजस्व की हानि पहुँचाने की छूट दे दी थी ,क्योंकि डेढ़ साल की लम्बी अवधि तक लगातार सरकार के साथ धोखा किया जाता रहा ,जबकि नियमानुसार तौजी सत्यापन करवाई जाती तो पहले महीने अर्थात 30 नवंबर 2016 को किए गए 6 लाख के पहले फर्जीवाड़े को दिसंबर 2016 में ही पकड़ लेते ।

30 नवंबर को बनवाए गए 10 हजार के चालान को 6 लाख 10 हजार का कर दिया था और 02 दिसंबर 2016 को 5 हजार के चालान को 50 लाख 5 हजार का कर दिया गया था ये फर्जी चालान चोरल देशी शराब दुकान के लिए बनाया गया था । आश्चर्य इस बात का भी है कि पूरा फर्जीवाड़ा एसी संजीव दुबे ने सहायक आबकारी आयुक्त इंदौर का पद संभालने के बाद शुरू हुआ जो 40 करोड़ 40 लाख तक पहुच गया। जबकि दुबे के पूर्व पदस्थ ऐसी विनोद रघुवंशी, मुकेश नेमा और संजय तिवारी गम्भीरता से हर माह तौजी सत्यापन करवाते थे ।

आबकारी कमिश्नर अरुण कोचर ने 5 अफसरो की जाँच कमेटी बनाई किन्तु पूरा फर्जीवाड़ा सामने आए 15 दिन बीत गए ,ना दुबे के खिलाफ विभागीय करवाई हुई ,ना कमेटी जाँच रिपोर्ट बना पाई अर्थात सरकार के साथ बड़ा व लगातार धोखा करने और होने देने के बाद भी करवाई जीरो बटे सन्नाटा है ,इससे ऊपर तक सेटिंग की चर्चा को हवा मिल रही है । मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान के जीरो टालरेंस का आबकारी एसी दुबे ने खुले आम मजाक उड़ा दिया है ।

एसी दुबे ने कलेक्टर निशान्त वरवड़े से भी झूठ बुलवाया कि फर्जीवाड़ा करने वालों में से एक राजु दशवंत को हिरासत में ले लिया है ,जबकि एसी दुबे ने राजु को छोड़ने की पहले ही सेटिंग कर ली थी जिसका वीडियो भी सामने आया है। एसी संजीव दुबे के कारण पूरा विभाग बदनाम हो गया और लोग के साथ अन्य विभाग के अफसर भी हर आबकारी अधिकारी को शक की नजर से देखने लगे है । सूत्रों के अनुसार राजु दशवंत एसी दुबे का खास आदमी है और दुबे के कहने पर ही ठेकेदारों ने राजु को काम दिया और उसका हिस्सा डाला । इस बड़े फर्जीवाड़े से विभाग की इज्जत विभाग के अफसरो ने ही बेच दी है ऐसा लग रहा है ।

कलेक्टर भी घेरे में आए ,भेजी रिपोर्ट ,किसकी क्या जिम्मेदारी ,किसने नही निभाई –

डीसी विनोद रघुवंशी ने एक रिपोर्ट वरिष्ठ कार्यालय को भेजी है जिसमें आबकारी विभाग का प्रमुख होने के नाते कलेक्टर की भूमिका और जिम्मेदारी क्या होती है ,सहायक आबकारी आयुक्त और अन्य आबकारी अधिकारियों की क्या जिम्मेदारी होती है बताते हुए यह भी बताया गया है कि किसने किस जिम्मेदारी का निर्वहन नही किया । अपनी रिपोर्ट में भी डीसी रघुवंशी ने माना है कि एसी संजीव दुबे अपनी जिम्मेदारी निभाने में नाकाम रहे है अर्थात एसी दुबे ने अपने कर्तव्य का पालन नही किया है । इस मामले में नए कलेक्टर निशांत वरवड़े भी एसी संजीव दुबे से खासे नाराज है ।

इन आदेशों ,नियमों का उल्लघंन कर ,पालन नही किया एसी दुबे ने –

1. कोषालय संहिता के नियम 53 (5) में कार्यालय प्रमुख होने के नाते एसी दुबे की ही जिम्मेदारी है कि वो विभाग में जमा होने वाले चालान का कोषालय से मिलान करवाए।
2. आबकारी एक्ट में भी रेवन्यू आफिसर होने के नाते एसी दुबे की ही इसके लिए जिम्मेदारी है ।
3. आबकारी आयुक्त अरुण कोचर ने आदेश क्रं./8/सांख्यिकीय/2016/41 दिनांक 24/04/2016 जारी कर एसी दुबे को अंतर आ रही राशि का व्यक्तिगत रुचि लेकर कोषालय से सत्यापन करने का आदेश दिया था ,किन्तु एसी दुबे ने विभाग के वरिष्ठ अधिकारी और आबकारी आयुक्त कोचर के इस आदेश का पालन नही किया ।
4. प्रत्येक माह में सहायक आबकारी आयुक्त कार्यालय से तौजी भेज कर कोषालय से चालान के माध्यम से राशि सत्यापन करने का नियम है किन्तु एसी दुबे ने इसमें भी जानबूझकर और लगातार गंभीर लापरवाही की।
5. तौजी मिलान की जिम्मेदारी विभाग के लिपिक अनमोल गुप्ता को दी जिस पर सीधे एसी दुबे के हस्ताक्षर होते है ,इतने गंभीर कार्य के लिए बाबुओं के वर्क वितरण में ही एडीईओ को काम देखने का लिख दिया गया, किन्तु काम स्वयं एसी संजीव दुबे देखते रहे । एडीईओ से कभी हस्ताक्षर नही लिए गए।
6. पहले उपकोषालय थे तब अलग,अलग तौजी सत्यापन के लिए भेजी जाती थी , किन्तु जब से कम्प्यूटरीकृत व्यवस्था लागू हुई है तब से जिला मुख्यालय अर्थात एसी कार्यालय से ही तौजी सत्यापन के लिए भेजी जाती है ,अर्थात पूरे फर्जीवाड़े के लिए सहायक आबकारी आयुक्त कार्यालय ही जिम्मेदार है ।

बत्ती लगाने की नही देने की चीज है – पीएस –

वाणिज्यिक कर विभाग के प्रमुख सचिव मनोज श्रीवास्तव स्वयं इस पूरे फर्जीवाड़े पर नजर रखे हुए है । श्रीवास्तव हर अपडेट डीसी विनोद रघुवंशी और कमिश्नर अरुण कोचर से ले रहे है । श्रीवास्तव का कहना है मै सरकार की पाई – पाई वसूलुगा ,मैंने करवाई का सेडयूल भी बना लिया है , कोई कितना भी ताकतवर बने दोषी को नही छोड़ूँगा ,एसी करवाई होगी जो बड़ा मेसेज देगी ,बस वक्त मेरा होगा । मनोज श्रीवास्तव सख्त करवाई के लिए जाने जाते है इसलिए फर्जीवाड़ा कर सरकार के साथ किए गए इस बड़े धोखे में उनसे बड़े अफसर के खिलाफ बड़ी करवाई की उम्मीद है । श्रीवास्तव ने बताया की दिनांक 16 अगस्त तक फर्जीवाड़ा करने वाले शराब ठेकेदारों से 12 करोड़ 50 लाख वसूले जा चुके है । पीएस मनोज श्रीवास्तव की शैली दबंग अफसर की मानी जाती है ,लेखक होने के साथ बेबाक बोलने के लिए जाने जाते है जब गाड़ियों पर से लाल बत्ती हटाने की बात आई थी तब उन्होंने कहा था बत्ती लगाने की नही देने की चीज है ,यही शैली श्रीवास्तव की काम करने के मामले में भी है । अब बस देखना ये है कि पीएस श्रीवास्तव एसी दुबे में कैसे और कैसी बत्ती देते है ।

आबकारी हिरासत का वीडियो सामने आया –

सरासर सरकार के साथ बड़ा धोखा करने वाले राजु दशवंत को आबकारी विभाग ने दिनांक 06 अगस्त को ही हिरासत में ले लिया था किन्तु दिनांक 13 अगस्त को इंदौर जिला कोर्ट में विभाग की तरफ़ से दिए जवाब में बताया कि विभाग ने राजु को हिरासत में नही लिया है । राजु कोर्ट परिसर से फरार हो गया और आबकारी अफसरो के साथ रावजी बाजार थाना पुलिस हाथ मलते रह गई । दिनांक 13 अगस्त को कोर्ट में आबकारी विभाग की तरफ़ से राजु को हिरासत में नही लेने का जवाब पेश किया है वही दूसरी तरफ़ आबकारी विभाग के कंट्रोल रूम में राजु के हिरासत का वीडियो सोशल मीडिया में वायरल हो रहा है । राजु के भाई सागर पिता बाबुराव ने धारा 97 के तहत कोर्ट में आवेदन लगाया था ।

छोटे कर्मचारी पर जिम्मेदारी डाल बचने की कवायद –

आबकारी एक्ट , कोषालय संहिता और आयुक्त आबकारी के आदेशानुसर एसी संजीव दुबे सीधे तौर पर पूरे फर्जीवाड़े के लिए जिम्मेदार है पर दुबे विभाग के छोटे कर्मचारी और एडीईओ पर पूरी जिम्मेदारी डाल कर ख़ुद बचने की कवायद कर रहे है ,इसके लिए दुबे सीएम हाऊस में अपने संपर्कों का इस्तेमाल करने के लिए दिनांक 16 अगस्त से भोपाल में डेरा डाले हुए है ।

एसे में संजीव दुबे की गंभीर लापरवाही के साथ वरिष्ठ अधिकारियों के आदेश का पालन नही करना प्रमाणित हो रहा है । वही दूसरी और सरकार के साथ लगातार धोखा करने वाले राजु को हिरासत में लेकर छोड़ देने से पूरे मामले में एसी दुबे की मोटी सांठ – गांठ भी प्रमाणित हो रही है । इस प्रकार एसी दुबे का अपने ही विभाग और सरकार से गददारी करना भी प्रमाणित हो रहा है ।

फर्जीवाड़ा कर ,खुले आम सरकार से किया धोखा ,जाँच रिपोर्ट ,फिर भी सहायक आबकारी आयुक्त के खिलाफ कारवाई नही

कुतरचित तरीक़े से सरकार के साथ लगातार बड़ा धोखा किया गया ,40 करोड़ 40 लाख से अधिक के राजस्व की हानि पहुचाई गईं, फरार आरोपी को हिरासत में लेकर छोड़ दिया गया ,फिर भी 16 दिन बीत जाने के बाद आबकारी एसी संजीव दुबे के खिलाफ कोई कारवाई नही की गईं, जबकि प्राथमिक रिपोर्ट में डीसी ने दोषी बताया ,पीएस स्वयं पूरे केस पर नजर रख रहे है और पीएस के निर्देशन में ही पूरी करवाई के साथ वसूली की जा रही है अब तक बिना ब्याज के 14 करोड़ वसूले जा चुके है ~ 

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