अगले तीन सप्ताह में सामान्य होंगे हालात: वित्त मंत्रालय

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वित्त मंत्रालय ने गुरूवार को कहा कि नोटबंदी के बाद नए नोटों के बाजार में पहुंचने से स्थिति में सुधार आया है। अगले तीन सप्ताह में हालात पहले की तरह सामान्य होंगे। इस दौरान सरकार लोगों को डिजिटल लेनदेन के लिए जागरूक करेगी, ताकि भविष्य में देश की अर्थव्यवस्था पूरी तरह से पारदर्शी और साफ-सुथरी हो।

आर्थिक मामलों के सचिव शक्तिकांत दास ने अमेरिका के फेडरल रिजर्व द्वारा की गई ब्याज दर वृद्धि के झटके को सहने में भारत के सक्षम होने की बात भी कही। उन्होंने कहा कि इसके शुरूआती दौर के बाद मुद्रा विनिमय बाजार में स्थिरता आ जाएगी। उन्होंने कहा कि इससे दुनियाभर के प्रमुख बाजारों में जो अनिश्चितता बनी हुई थी वह समाप्त होगी। भारतीय बाजारों में इस बढ़ोत्तरी के असर को पहले ही खपा लिया गया है। भारत में दूसरी उभरती अर्थव्यवस्थाओं के मुकाबले ब्याज दरें कम लगतीं हैं लेकिन हमें इसे संतुलित करना होगा ताकि इससे रूपये पर असर नहीं हो।

दास ने कहा कि नोटबंदी के 36 दिनों के दौर में नए नोट बाजार में पहुंचने से हालात बेहतर हुए हैं। उन्होंने अनुमानित आंकड़ा बताया कि बाजार में 2000 और 500 के नए नोट 5 लाख करोड़ से ज्यादा पहुंच चुके हैं। जबकि इस दौरान 80 हजार करोड़ के 100 के नोट भी छपे हैं जो बैंकों के माध्यम से बाजार में पहुंच चुके हैं। इसके अलावा उन्होंने 50, 20 और दस के नोट भी छापकर जनता तक पहुंचाए जाने की जानकारी दी। हालांकि उन्होंने इसका कोई आंकड़ा स्पष्ट नहीं किया। अब तक कितने नोट छापे जा चुके हैं के सवाल पर उन्होंने कहा कि इसका कोई स्पष्ट आंकड़ा उनके पास नहीं है, लेकिन बंद किए गए नोट के आंकड़े की तुलना में 50 प्रतिशत के करीब नोट छापे जा चुके हैं। हर दिन बड़ी तादाद में नोट जनता तक पहुंच रहे हैं और 500 के नोट छापने में तेजी लाई गई है। साथ ही दास ने स्पष्ट किया कि बड़े नोट अलग मशीन में छापे जा रहे हैं जबकि छोटे नोट अलग मशीन से छप रहे हैं।

उन्होंने बताया कि कुल एटीएम में 2 लाख को नए नोटों के मुताबिक किया जा चुका है। तमाम बैंकों के एटीएम में नगदी नहीं होने के सवाल पर उन्होंने कहा कि कई बैंक अपने ग्राहकों को बैंक काउंटर से नगदी मुहैया कराने की वजह से एटीएम में नगदी नहीं डलवा रहे थे। इसकी शिकायत मिलते ही मंत्रालय ने बैंकों को आगाह किया है। उन्होंने कहा कि मंत्रालय को यह शिकायत भी मिली है कि बैंक ग्राहकों को सरकार द्वारा काउंटर से 24 हजार की तय रकम नहीं दे रहे हैं। ऐसा बैंक नगदी की कमी होने की वजह से निजी तौर पर कर रहे हैं जिसके लिए उन्हें हिदायत दी गई है।

काली कमाई करने वालों से बैंकों की मिलीभगत पर दास ने कहा कि वित्तीय खुफिया विभाग की रिपोर्ट पर एजेंसियां कार्रवाई कर रही हैं। इनमें बहुत से ऐसे मामलों हैं जिनमें बैंकों द्वारा ही एफआईयू को रिपोर्ट दी गई है। यह कहना उचित नहीं कि बैंकों की मिलीभगत है, क्योंकि इससे सभी आरोपित होते हैं। अभी जांच चल रही है और बैंकों के शीर्ष अधिकारियों को को हरेक लेनदेन की निगरानी और रिपोर्ट देने के बारे में पहले ही कहा जा चुका है

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